-नियमों की धज्जियां उड़ाईं, RTPP नियमों को ताक पर रखकर जारी किए शुद्धिपत्र (Corrigendum), पारदर्शिता और निष्पक्षता पर फिरा पानी
-फर्स्ट क्लास ‘फैट एकम्प्ली’, तकनीकी खामी ऐसी कि सुधार की गुंजाइश ही नहीं बची, अब नए सिरे से लगाना पड़ेगा टेंडर
-भवानी मंडी और सुनेल कस्बा प्यासा, 2024-25 बजट घोषणा का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में देरी, 14 गांवों में पेयजल संकट
Expose Now Exclusive Report
जयपुर/झालावाड़। आम जनता को नल से जल पहुंचाने के सरकारी दावों को खुद सरकारी तंत्र ही किस तरह पलीता लगाता है, इसका एक बड़ा और चौंकाने वाला नमूना जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में देखने को मिला है। झालावाड़ जिले के भवानी मंडी, सुनेल टाउन और पिपलाद जल आपूर्ति योजना से जुड़े 14 गांवों की प्यास बुझाने के लिए लाया गया 31.53 करोड़ का प्रोजेक्ट अफसरों की गंभीर लापरवाही के कारण ‘डस्टबिन’ में चला गया है। हाल ही में संपन्न हुई फाइनेंस कमेटी (FC) की बैठक में इस पूरे बिडिंग प्रोसेस को पूरी तरह से निरस्त (Annul) करने का एक चौंकाने वाला फैसला लिया गया है।

अफसरों की वो ‘एक गलती’ जिसने करोड़ों का टेंडर किया निरस्त:-
इस पूरे प्रोजेक्ट का बंटाधार किसी वित्तीय कमी से नहीं, बल्कि विभाग के आला अधिकारियों की तकनीकी और कानूनी लापरवाही से हुआ। झालावाड़ जिले के भवानी मंडी, सुनेल टाउन और पिपलाद जल आपूर्ति योजना से जुड़े 14 गांवों की प्यास बुझाने के लिए 31.53 करोड़ के टेंडर प्रक्रिया चल रही थी, तो विभाग द्वारा Corrigendum (शुद्धिपत्र) संख्या 1 और 2 जारी किए गए थे। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि इन शुद्धिपत्रों को राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता (RTPP) नियम, 2013 के नियम 43, नियम 43(7) और नियम 51(2) के प्रावधानों के तहत कानूनी रूप से समाचार पत्रों में प्रकाशित ही नहीं किया गया। जब बिड इवैल्यूएशन कमेटी (BEC) ने इसकी जांच की, तो पाया कि यह चूक अक्षम्य है और इसने पूरी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को ही खत्म कर दिया है।
क्या होता है ‘फैट एकम्प्ली’ (Fait Accompli)?

कानूनी भाषा में इसका मतलब है कि कोई ऐसी घटना या गलती हो चुकी है जिसे अब सुधारा नहीं जा सकता और जिसके परिणाम को स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण यह टेंडर इसी स्थिति में पहुंच गया था।
5 कंपनियां रेस में थीं, बार-बार बढ़ानी पड़ी वैलिडिटी:-
इस टेंडर को हासिल करने के लिए के लिए राजस्थान की 5 कंस्ट्रक्शन कंपनियां मैदान में थीं:
-मैसर्स गोदारा कंस्ट्रक्शन कंपनी
-मैसर्स बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी
-मैसर्स गुलाब चंद कुमावत
-मैसर्स आरआरबीसी इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्रा. लि.
-मैसर्स कैलाश चंद चौधरी
इन कंपनियों ने 29 अगस्त 2025 को अपने टेक्निकल बिड जमा किए थे। टेंडर प्रक्रिया इतनी कछुआ चाल से चली कि कंपनियों को अपनी ऑफर वैलिडिटी बार-बार आगे बढ़ानी पड़ी (किसी को दिसंबर 2025 तक तो किसी को मार्च 2026 तक)। लेकिन आखिरकार, अधिकारियों के इस ‘ब्लंडर’ ने ठेकेदारों की मेहनत और जनता की उम्मीदों दोनों पर पानी फेर दिया।
कमेटी दर कमेटी घूमती रही फाइल, आखिर में मिला ‘रिजेक्शन’:-
इस घोटाले और लापरवाही की परतें तब खुलीं जब 10 नवंबर 2025 को एम्पॉवर्ड कमेटी (EPC) की चौथी बैठक हुई। वहां ‘मैसर्स कैलाश चंद चौधरी’ नाम की फर्म की पात्रता को लेकर संदेह हुआ, जिसके बाद री-एग्जामिनेशन के आदेश दिए गए। जब मुख्य अभियंता (CE, U&NRW) की अध्यक्षता में 23 दिसंबर 2025 को रिव्यू मीटिंग हुई, तब जाकर विभाग के पैरों तले जमीन खिसकी। अधिकारियों को समझ आया कि शुद्धिपत्र (Corrigendum) का प्रकाशन नियमों के मुताबिक हुआ ही नहीं है। इसके बाद 5 जनवरी 2026 को हुई ईपीसी की छठी बैठक में टेंडर निरस्त करने की सिफारिश की गई, जिस पर अब फाइनेंस कमेटी ने अंतिम मुहर लगा दी है।

जनता कब तक रहेगी प्यासी?
फाइनेंस कमेटी के कड़े फैसले के बाद अब इस पूरे टेंडर को रद्द कर ‘फ्रेश बिड’ (नया टेंडर) आमंत्रित करने के आदेश दिए गए हैं। मुख्य अभियंता (CE, U&NRW) को इस पर तुरंत एक्शन लेने को कहा गया है। बड़ा सवाल ये है कि बजट घोषणा 2024-25 का यह काम 10 साल के संचालन और रखरखाव (O&M) से जुड़ा था। अफसरों की इस लापरवाही के कारण अब नया टेंडर जारी होने, कंपनियों के आवेदन करने और वर्क ऑर्डर जारी होने में महीनों का वक्त दोबारा खराब होगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि झालावाड़ की जनता को अधिकारियों की इस अकर्मण्यता की सजा क्यों भुगतनी पड़े? क्या नियम दबाकर बैठने वाले इन इंजीनियरों और जिम्मेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now