राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री जन आवास योजना (2015 नीति) में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। प्रदेश के 31 शहरों में घोषित 28 लाख नए आवासों के निर्माण को लेकर सरकार ने बिल्डरों की मनमानी पर लगाम कस दी है। अब निजी डेवलपर्स अपनी मर्जी से फ्लैट या प्लॉट का आवंटन नहीं कर पाएंगे, यह जिम्मेदारी अब सीधे तौर पर विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों की होगी।
पुराना बकाया और नए लक्ष्य
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में स्वीकृत 3.34 लाख आवासों में से लगभग 94 हजार का निर्माण अब भी बाकी है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव (CS) की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 75 हजार नए आवासों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार 475 करोड़ रुपए की अनुदान राशि लाभार्थियों को वितरित करेगी।
ये 8 प्रमुख बदलाव बदल देंगे योजना की तस्वीर:
- निकायों का नियंत्रण: आवंटन का पूरा अधिकार अब विकास प्राधिकरण, UIT और नगर निकायों के पास होगा, ताकि अपनों को रेवड़ी बांटने का खेल बंद हो।
- डिजिटल आवंटन: प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए पूरी आवंटन प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है।
- सस्ती दरें: आवासों की अधिकतम बिक्री दर को 1,850 रुपए प्रति वर्ग फीट करने की तैयारी है, जो वर्तमान में 2,800 रुपए तक पहुंच चुकी है।
- EWS-LIG को प्राथमिकता: 5 प्रतिशत सस्ते फ्लैट्स अनिवार्य रूप से केवल आर्थिक कमजोर वर्ग और अल्प आय वर्ग को ही देने होंगे।
- निर्माण की सीमा: अब भूखंडों पर G+3 के बजाय केवल G+2 (तीन मंजिल) तक के निर्माण की ही अनुमति मिलेगी।
- बिल्डर्स की जांच: निर्माण में देरी करने वाले बिल्डरों के खिलाफ जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है।
- पारदर्शी किस्त: प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत 14 शहरों के लिए 9763 घरों की किस्त जारी कर दी गई है।
- सीधा लाभ: अब लाभार्थियों को अनुदान राशि मिलने में देरी नहीं होगी, इसके लिए मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत किया गया है।
पारदर्शिता की ओर कदम
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि “मुख्यमंत्री जन आवास योजना” का लाभ केवल उन लोगों को मिले जो वास्तव में इसके पात्र हैं। आवंटन का जिम्मा निकायों को सौंपने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और मध्यम वर्ग को सस्ती दरों पर घर मिल सकेगा।
