करौली: राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी योजना RGHS (Rajasthan Government Health Scheme), जिसका उद्देश्य पेंशनर्स, सीनियर सिटीजन और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना है, वही योजना करौली जिले में बुजुर्गों और निशक्तजनों के लिए भारी परेशानी का सबब बनती नजर आ रही है। 1 अगस्त से जिला अस्पताल में ई-पर्ची व्यवस्था लागू होने के बाद से मरीजों को दवा लेने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ई-पर्ची और सॉफ्टवेयर की पेचीदगियां
नए नियमों के तहत 75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को फोटो वाली पर्ची की अनिवार्यता से राहत का प्रावधान है, लेकिन पैरालिसिस, हार्ट डिजीज, अपंगता और अन्य असाध्य रोगों से पीड़ित निशक्त मरीजों के लिए RGHS सॉफ्टवेयर की प्रक्रिया जी का जंजाल बन गई है।
- RGHS काउंटर पर डॉक्टर का परामर्श और नाम बताने के बाद ई-पर्ची की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। यदि संबंधित चिकित्सक अवकाश पर हैं, तो बुजुर्गों की परेशानी और बढ़ जाती है।

- RGHS नोडल अधिकारी डॉ. सीएल मीना ने भी स्वीकार किया है कि असाध्य रोगियों के लिए ई-पर्ची जारी करने के मामले में सॉफ्टवेयर में विकल्प न खुलने और गति धीमी होने जैसी तकनीकी समस्याएं आ रही हैं।

अस्पताल में लंबी कतारें और मूलभूत सुविधाओं का अभाव
जिला अस्पताल में फिलहाल ओपीडी (OPD) के लिए मात्र एक ही RGHS काउंटर होने के कारण मरीजों को लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। उमस और भीड़ के बीच काउंटर पर पंखे और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। इसके अलावा, मंडरायल रोड ताल क्षेत्र के मरीजों को ई-पर्ची के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर कोतवाली के पास स्थित जिला अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। फॉलोअप मरीजों को शुगर व अन्य जांच रिपोर्ट सॉफ्टवेयर में अपडेट कराने के लिए भी बार-बार अस्पताल आना पड़ रहा है।
डॉक्टरों और मेडिकल संचालकों की अपनी मजबूरियां
- मेडिकल स्टोर संचालक: RGHS से जुड़े मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि नई SOP के तहत बिना ई-पर्ची दवा देने पर उन्हें भुगतान मिलने में परेशानी हो सकती है। यदि सरकार पुरानी व्यवस्था की तरह सामान्य पर्ची पर दवा देने के आदेश दे, तो कोई दिक्कत नहीं होगी।

- घरेलू इलाज करने वाले चिकित्सक: घर पर इलाज और नियमित फॉलोअप करने वाले डॉक्टरों के लिए भी यह नई SOP सिरदर्द बन गई है। डॉक्टरों को अपनी SSOID से पर्ची अपलोड कर TID जनरेट करनी पड़ती है, जिसमें लगने वाले अतिरिक्त समय के कारण वे अन्य सामान्य मरीजों को समय नहीं दे पा रहे हैं।
पेंशनर्स समाज ने उठाई आवाज और कलेक्टर का आश्वासन
पेंशनर्स समाज के जिलाध्यक्ष बजरंग लाल शर्मा ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिस योजना से राहत मिलनी चाहिए थी, उसी से बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रताड़ित हो रहे हैं। समाज इस मामले को लेकर जल्द ही जिला कलेक्टर से मिलेगा।
वहीं, इस पूरे मामले पर जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि पीएमओ (PMO) से वार्ता कर सीनियर सिटीजन और असाध्य रोगियों के लिए जल्द से जल्द कोई बेहतर और सरल विकल्प निकाला जाएगा।
