क्या आप भी बिना वजह मानसिक तनाव में रहते हैं? जानिए कुंडली के कौन-से ग्रह खींचते हैं डिप्रेशन की ओर

डिप्रेशन की ओर आकर्षित करने वाले कुंडली के ग्रह

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली व्यक्ति के स्वभाव, मानसिक प्रवृत्तियों, भावनात्मक शक्ति तथा जीवन में आने वाली चुनौतियों के संकेत देती है। इसलिए मानसिक तनाव या अवसाद की संभावना का अध्ययन भी कुंडली के माध्यम से किया जाता है। क्या आपकी कुंडली में भी ऐसा कोई ग्रह अथवा योग है जो आपको मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है या फिर चिंता अथवा डिप्रेशन की ओर खींचता है। आज के समय में डिप्रेशन (अवसाद)  दुनिया की सबसे गंभीर मानसिक समस्याओं में से एक माना जाता है। लगातार तनाव, असफलता, पारिवारिक समस्याएँ, आर्थिक दबाव, रिश्तों में कड़वाहट और बदलती जीवनशैली के कारण लाखों लोग मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। डिप्रेशन आज एक सामान्य बीमारी होती जा रही है। बढ़ते काम के दवाब और कई व्यक्तिगत उलझनो के कारण व्यक्ति को काफी तनाव का सामना करना पड़ता है जिससे व्यक्ति अवसाद ग्रस्त हो जाता है। कुछ लोग मानसिक परेशानियों के कारण गलत आदतों के शिकार भी हो जाते हैं जिससे अवसाद में जाने की संभावना और बढ़ जाती है। अक्सर कई लोग पूछते हैं कि क्या मानसिक कमजोरी अथवा डिप्रेशन की प्रवृत्ति का कुंडली के माध्यम से पता लगाया जा सकता है तो आईए जानते हैं कि कुंडली के कौनसे ग्रह व्यक्ति को डिप्रेशन अथवा अवसाद की ओर खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कुंडली में डिप्रेशन देने वाले प्रमुख ग्रह-      

कमजोर चंद्रमा वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति, कल्पनाशक्ति और संवेदनशीलता का कारक ग्रह माना गया है। यह चंद्रमा जब नीच राशि का होकर कुंडली के 6, 8 अथवा 12 वे भाव में पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट होकर बैठता है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति अवसाद और व्यर्थ की चिंता की ओर बढ़ता है।

शनि की खराब स्थितिशनि अनुशासन, धैर्य और कर्म का ग्रह है, लेकिन जब कुंडली में शनि निर्बल हो अथवा अशुभ भावों में पाप ग्रहों से युति करता है तो ऐसी स्थिति में भी व्यक्ति खुद को अकेला और असहाय महसूस करता है जिससे उसका आत्मविश्वास भी काफी प्रभावित होता है। 

कमजोर सूर्य ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, आत्मा और निर्णय लेने की क्षमता का कारक माना गया है। जब कुंडली में सूर्य नीच राशि का अथवा पाप ग्रहों के साथ में अशुभ भावों में स्थित होकर पीड़ित होता है तो यह सूर्य व्यक्ति के आत्मविश्वास को कमजोर करने के साथ ही निर्णय लेने की क्षमता को भी काफी प्रभावित कर देता है।

राहु भ्रम और मानसिक अशांति का कारक ग्रह माना गया है। राहु व्यक्ति की इच्छाओं, भ्रम, असंतोष और असामान्य मानसिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करता है। यदि राहु अशुभ हो  तो व्यक्ति को अत्यधिक चिंता, भय, भ्रम, बेचैनी, अनावश्यक कल्पनाएँ, भविष्य की चिंता तथा मानसिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। इसे ग्रहण योग के रूप में भी देखते हैं।

केतु विरक्ति और एकांत का कारक ग्रह है। केतु आध्यात्मिकता का ग्रह माना है, लेकिन यदि इसकी स्थिति प्रतिकूल हो तो व्यक्ति संसार से कटाव, अकेले रहने की प्रवृत्ति, उदासीनता तथा भावनात्मक दूरी महसूस कर सकता है। यदि कुंडली में अन्य ग्रह भी मानसिक पक्ष को कमजोर कर रहे हों, तो केतु का प्रभाव अवसाद जैसी परिस्थितियों को बढ़ा सकता है।

 कमजोर मंगलज्योतिष में मंगल ग्रह को पराक्रम, साहस और व्यक्ति की आगे बढ़ने की क्षमता को दिखाता है। यदि मंगल ग्रह भी कमजोर होकर पीड़ित हो जाए तो इसका उस व्यक्ति के विश्वास और निर्णय लेने की क्षमता पर काफी दुष्प्रभाव देखने को मिलता है।

रत्नों का गलत प्रयोगकई बार व्यक्ति गलत रत्नों को धारण करके भी अपनी समस्या काफी बढ़ लेता है जैसे कि ज्यादातर लोग मानसिक शांति के लिए चंद्रमा का रत्न मोती धारण कर लेते हैं लेकिन यदि चंद्रमा अष्टमेश या द्वादशेष होकर अशुभ भावों में बैठा है तो मोती धारण करना व्यक्ति को डिप्रेशन की ओर ले जा सकता है इसलिए रत्नों का चुनाव भी सूक्ष्म रूप से कुंडली का विश्लेषण करने के बाद ही आपको करना चाहिए।

Note- यह लेख ज्योतिष के दृष्टिकोण पर आधारित है और ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से लिखा गया है।


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