झालावाड़: राजस्थान के झालावाड़ जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए वन विभाग के ‘वसूली नेक्सस’ का पर्दाफाश किया है। जंगल और लकड़ियों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले रक्षक ही यहां भक्षक बन बैठे थे। एसीबी की टीम ने वन विभाग के गश्ती दल के क्षेत्रीय वन अधिकारी (रेंजर) और विभागीय चालक को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद पूरे वन महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या था पूरा खेल? वैध व्यापार पर ‘अवैध वसूली’
यह पूरा मामला रायपुर क्षेत्र के रहने वाले इम्तियाज नामक लकड़ी व्यापारी (टिंबर ट्रेडर) से जुड़ा है। इम्तियाज के पास लकड़ी खरीदकर बाहर सप्लाई करने का वैध लाइसेंस है। इसके बावजूद गश्ती दल के ये भ्रष्ट अधिकारी उसे परेशान कर रहे थे। व्यापारी से प्रति गाड़ी 5,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। जब व्यापारी ने आनाकानी की, तो अंततः 15,000 रुपये की ‘मासिक बंदी’ (Monthly Extortion) के रूप में यह भ्रष्ट सौदा तय हुआ।

ACB ने ऐसे बिछाया जाल (The Trap):
लगातार हो रही इस ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर इम्तियाज ने ACB का दरवाजा खटखटाया। ACB झालावाड़ के IG साजिद खान के अनुसार:
- सत्यापन: शिकायत मिलते ही सबसे पहले खुफिया तरीके से रिश्वत की मांग का सत्यापन (Verification) कराया गया, जिसमें आरोप पूरी तरह सही पाए गए।
- प्लानिंग और एक्शन: डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन और ASP प्रेरणा शेखावत के नेतृत्व में टीम ने एक अचूक जाल बिछाया।
- गिरफ्तारी: 4 जून को जैसे ही इन अधिकारियों ने व्यापारी से 15,000 रुपये की रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, पहले से घात लगाए बैठी ACB की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।
आगे की जांच: क्या और भी हैं शामिल?
ASP प्रेरणा शेखावत ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल दोनों आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। उनके आवासों और अन्य ठिकानों पर तलाशी अभियान (Search Operation) चलाया जा रहा है ताकि बेनामी संपत्ति और अन्य दस्तावेजों को खंगाला जा सके। एसीबी अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि इस ‘वसूली सिंडिकेट’ की जड़ें वन विभाग में और कितनी गहरी हैं और इस घूसखोरी के खेल में ऊपरी स्तर के कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं।
