डिजिटल अरेस्ट गिरोह पर CBI का देशभर में बड़ा प्रहार, 16 राज्यों में 80 ठिकानों पर छापेमारी

नई दिल्ली/जयपुर। देशभर में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी मामलों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। एजेंसी ने एक समन्वित अभियान के तहत 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 80 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य उन गिरोहों को तोड़ना था जो खुद को CBI, ED, पुलिस, कस्टम या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे।

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?

डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक तरीका है। इसमें ठग वीडियो कॉल या फोन कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं कि उनके आधार कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंक खाते का इस्तेमाल किसी अपराध में हुआ है। इसके बाद वे खुद को CBI, ED, पुलिस या न्यायिक अधिकारी बताकर पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर रखते हैं और उसे “डिजिटल हिरासत” में होने का दावा करते हैं। डर और मानसिक दबाव के कारण कई लोग अपनी जमा पूंजी ठगों के खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।

16 राज्यों में फैला था नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार यह साइबर नेटवर्क किसी एक राज्य तक सीमित नहीं था। इसके तार कई राज्यों और विदेशों तक फैले हुए मिले हैं। ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खाते, फर्जी सिम कार्ड, कॉलिंग सिस्टम, डिजिटल उपकरण और धन के ट्रांसफर चैनलों की पहचान की गई। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, बैंकिंग दस्तावेज, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए।

फर्जी अधिकारियों के नाम पर करोड़ों की ठगी

CBI की जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी, पार्सल घोटाले या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में फंसाने की धमकी देते थे। इसके बाद उन्हें “जांच पूरी होने तक सुरक्षित सरकारी खाते” में पैसे जमा कराने के लिए मजबूर किया जाता था। कई मामलों में पीड़ितों को घंटों या दिनों तक वीडियो कॉल पर रखा गया और परिवार से संपर्क तक नहीं करने दिया गया।

म्यांमार, कंबोडिया और अन्य देशों तक पहुंचे तार

जांच एजेंसियों ने पहले की जांचों में पाया है कि कई डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क विदेशी साइबर अपराध सिंडिकेट्स से जुड़े हुए हैं। कुछ मामलों में इनके तार म्यांमार, कंबोडिया, चीन और अन्य देशों में संचालित साइबर फ्रॉड केंद्रों तक पहुंचे हैं। भारतीय युवाओं को नौकरी का झांसा देकर विदेश ले जाने और उनसे ऐसे कॉल सेंटरों में काम कराने के मामले भी सामने आए हैं।

बैंक खातों और म्यूल अकाउंट्स पर भी कार्रवाई

साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने के लिए हजारों “म्यूल अकाउंट्स” यानी ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं जो दूसरों के नाम पर खोले जाते हैं। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम कई स्तरों के खातों से गुजारकर विदेश भेजी जाती थी। कई राज्यों में ऐसे खातों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई है।

राजस्थान भी रहा जांच के दायरे में

राजस्थान लंबे समय से साइबर अपराधियों द्वारा म्यूल अकाउंट्स और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर जांच एजेंसियों की निगरानी में रहा है। पूर्व में बीकानेर, जोधपुर और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कुछ मामलों में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी नेटवर्क के लिंक सामने आ चुके हैं।

लोगों के लिए क्या है सावधानी?

साइबर विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, CBI, ED या अदालत का अधिकारी बताकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहे तो तुरंत कॉल काट दें और स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। किसी भी स्थिति में अज्ञात खाते में पैसा ट्रांसफर न करें।

आगे की जांच जारी

CBI ने जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। एजेंसी को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से देशभर में फैले साइबर ठगी नेटवर्क के कई और सदस्य सामने आएंगे। जांच के दायरे में विदेशी कनेक्शन, बैंकिंग चैनल और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से धन के लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।

देश में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच CBI की यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट जैसे संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े अभियानों में से एक मानी जा रही है। इससे साइबर अपराधियों के पूरे इकोसिस्टम पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।


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