EXPOSE Special- “साहब! प्यासे राजस्थान की प्यास बुझाते-बुझाते हम खुद दाने-दाने को मोहताज हो गए” – पीएचईडी ठेकेदारों का छलका दर्द

"ढाई साल का इंतज़ार, कर्ज़ का बोझ और टूटती उम्मीदें, जल जीवन मिशन के इन 'भगीरथों' को आखिर कब मिलेगा न्याय?"

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जयपुर। “ठेकेदारों की सुनो सरकार, हमारे भी हैं घर-बार” – यह महज एक नारा नहीं, बल्कि उन हजारों ठेकेदारों की सिसकी है, जो राजस्थान के कोने-कोने में ‘जल जीवन मिशन’ को धरातल पर उतारने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। राजस्थान, जहाँ कम वर्षा और घटते भूजल स्तर के कारण पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है, वहाँ इन ठेकेदारों को विकास की सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है, लेकिन आज यही कड़ी टूटने के कगार पर है।

भुगतान का ‘सूखा’: ढाई साल से अटकी है सांसें:-

प्रदेश के पेयजल प्रोजेक्ट्स में कार्यरत ठेकेदार पिछले लंबे समय से आर्थिक तंगहाली के दौर से गुजर रहे हैं। सरकारी सिस्टम की सुस्ती ने इनके सामने जीवन-मरण का प्रश्न खड़ा कर दिया है। प्रदेश में जल जीवन मिशन (JJM) के कार्यों का भुगतान अगस्त-2023 से और अमृत 2.0 योजनाओं का भुगतान मई-2025 से पूरी तरह बंद है। पिछले ढाई साल से रनिंग अकाउंट (RA) बिलों का भुगतान लंबित है। अगर कभी भुगतान होता भी है, तो वह इतने छोटे टुकड़ों में दिया जाता है कि उससे पुरानी उधारी भी चुकता नहीं हो पाती।

GST की दोहरी मार:-

ठेकेदार अपनी जेब से GST का भुगतान कर चुके हैं, लेकिन विभाग द्वारा इसकी प्रतिपूर्ति (Reimbursement) नहीं की जा रही है। यह स्थिति ठेकेदारों को आर्थिक रूप से खोखला कर रही है।

मजदूरों की बदहाली और बाजार में साख का संकट:-

एक ठेकेदार केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों का पालनहार होता है। भुगतान रुकने से यह पूरी चेन प्रभावित हो रही है। समय पर पैसा न मिलने के कारण ठेकेदार अपने मजदूरों और कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं, जिससे उनके घरों में संकट पैदा हो गया है। निर्माण सामग्री बेचने वाले विक्रेताओं ने अब ठेकेदारों को उधार सामान देना बंद कर दिया है। धन के अभाव में प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी सामान खरीदना असंभव हो गया है।

बैंकों का बढ़ता दबाव:-

काम समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों ने भारी-भरकम बैंक लोन लिए थे। अब किश्तें न चुका पाने के कारण वे डिफॉल्टर होने की कगार पर हैं और ब्याज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। लगातार वित्तीय संकट ने ठेकेदारों को मानसिक और सामाजिक रूप से तोड़ दिया है। बाजार और समाज में अपनी जिम्मेदारियां पूरी न कर पाने के कारण ठेकेदारों की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। लगातार बढ़ते कर्ज और सरकारी उदासीनता के कारण ठेकेदार भारी मानसिक दबाव और तनाव में जीने को मजबूर हैं। यह केवल ठेकेदारों की समस्या नहीं है, बल्कि राजस्थान की आम जनता के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।

विकास की कछुआ चाल:-

आर्थिक संकट के कारण कई परियोजनाओं की गति धीमी हो गई है और कुछ जगहों पर कार्य स्थगित करने की नौबत आ गई है। ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मार्मिक अपील की है कि वे सीधे जनता से जुड़े हुए हैं और जनता की इस पीड़ा को समझते हुए तत्काल हस्तक्षेप करें।

ठेकेदारों की स्पष्ट मांगें:-

-लंबित RA बिलों और GST राशि का एकमुश्त और तत्काल भुगतान हो।

-भविष्य में भुगतानों को लेकर एक पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

“जब ठेकेदार ही संकट में होगा, तो राजस्थान की प्यास कैसे बुझेगी?” यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो राजस्थान के पेयजल प्रोजेक्ट्स पर ‘शटडाउन’ की स्थिति बन सकती है, जो प्रदेश के विकास के लिए एक बड़ा झटका होगा।

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