जयपुर | राजस्थान सरकार ने प्रदेश में प्रस्तावित 3,200 मेगावॉट क्षमता के कोयला आधारित बिजली संयंत्र से बिजली खरीद का टेंडर रद्द कर दिया है। EXPOSE NOW ने 16 मई को मामले से जुड़ी पूरी सच्चाई सामने लाई थी। इसके बाद से ही हलचलें तेज थी। अब, राजस्थान ऊर्जा विकास एवं आईटी सर्विसेज लिमिटेड (RUVITL) ने DBFOO मॉडल के तहत जारी यह दीर्घकालिक टेंडर 11 जून के आदेश से वापस ले लिया है। CEA रिपोर्ट में बताया गया कि अतिरिक्त क्षमता की जरूरत नहीं है, इसलिए यह फैसला लिया गया। RUVITL ने 11 जून को जारी आदेश में डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (DBFOO) मॉडल के तहत जारी दीर्घकालिक बिजली खरीद टेंडर को निरस्त कर दिया।
टेंडर रद्द करने के पीछे की वजह

RERC ने भी मांगा था जवाब
टेंडर रद्द होने से कुछ सप्ताह पहले ही राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (RERC) ने राज्य की स्वामित्व वाली RVUNL को नोटिस भेज अतिरिक्त क्षमता की जरूरत को उचित ठहराने के लिए कहा था। आयोग ने पूछा था कि जब सोलर और विंड से रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है तो 3,200 MW का नया कोयला प्लांट क्यों जरूरी है। RUVITL का ताजा आदेश RERC की इसी आपत्ति के बाद आया है।
नवीकरणीय ऊर्जा बनी गेमचेंजर
टेंडर रद्द करने का फैसला ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। EXPOSE NOW ने ऊर्जा क्षेत्र के कई विश्लेषकों से इस संबंध में बात की। उनके मुताबिक टेंडर वापसी ये दिखाती है कि राजस्थान अब महंगे कोयला आधारित उत्पादन के बजाय सस्ते विकल्पों पर फोकस कर रहा है। राज्य में सौर ऊर्जा क्षमता अच्छी स्थिति में पहुंच चुकी है, पवन ऊर्जा भी तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही उभरती बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ BESS और अंतर-राज्यीय ग्रिड से बिजली उपलब्धता ने थर्मल की निर्भरता कम कर दी है। पीक आवर में भी अब सोलर+ बैटरी कॉम्बिनेशन से मांग पूरी की जा सकती है।

बड़ा सवाल- उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?
अगर 3,200 MW का नया कोयला प्लांट लगता तो अगले 25 साल तक उसकी फिक्स्ड कॉस्ट उपभोक्ताओं को देनी पड़ती, चाहे बिजली लें या न लें। CEA के आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में पहले से ही कई घंटे अधिशेष क्षमता रहती है। ऐसे में नया प्लांट लगाने से बिजली महंगी होने का खतरा था। अब, टेंडर रद्द होने से उपभोक्ताओं पर संभावित वित्तीय बोझ टल गया है।
कांग्रेस ने तुरंत लपका टेंडर निरस्तिकरण का मामला
कांग्रेस ने अपने अधिकारिक X हेंडल से आदेश की कॉपी को ट्वीट करते हुए इसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जीत बताया है और इसे अडानी से जोड़ते हुए प्रदेश सरकार को घेरा।