Expose Now स्पेशल रिपोर्ट: शिक्षा विभाग का वैकेंसी मॉडल फेल, प्रदेश के स्कूलों में टीचर्स की हर चौथी कुर्सी खाली, कैसे पूरा होगा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना?

-1.19 लाख से अधिक पद अब भी रिक्त; स्वीकृत पदों में से 25% स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्कूल से लेकर निदेशालय तक

-अदालती विवाद, लेटलतीफी और नियमों में बार-बार बदलाव बने प्रमुख कारण; व्याख्याता और वरिष्ठ अध्यापकों के 63 हजार से ज्यादा पद खाली

-क्रमोन्नत स्कूलों में स्थिति और भी गंभीर, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और खेल व्यवस्थाएं भी पूरी तरह प्रभावित

बीकानेर/जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। विभाग के अपने आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पिछले वर्षों में 15,928 नई नियुक्तियां और 66,037 पदोन्नतियां होने के बावजूद माध्यमिक शिक्षा विभाग में रिक्त पदों का ग्राफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वर्तमान में विभाग के भीतर 1 लाख 19 हजार 114 पद अब भी रिक्त हैं, यानी स्वीकृत पदों में से लगभग 25 प्रतिशत (हर चौथी कुर्सी) खाली पड़ी है। शिक्षा विशेषज्ञों का साफ मानना है कि जब तक विभाग सेवानिवृत्ति, पदोन्नति और नई भर्तियों का दीर्घकालिक मानव संसाधन आकलन नहीं करेगा, तब तक यह संकट दूर होना नामुमकिन है।

क्यों चरमरा रही है व्यवस्था? ये हैं प्रमुख कारण:

-भर्ती प्रक्रियाओं में सुस्ती: नई भर्तियों के लिए समय पर अभ्यर्थना न भेजना और परीक्षा आयोजनों में लगातार देरी होना।

-अदालती पचड़े और परिणाम में विलंब: परीक्षाओं के परिणाम जारी करने में होने वाला विलंब और भर्ती विवादों का अदालतों तक पहुंचना।

-नीतिगत खामियां: पदोन्नतियां समय पर न होना और सेवा नियमों में बार-बार बदलाव किया जाना।

पदों की स्थिति पर एक नजर (प्रमुख रिक्तियां):

-वरिष्ठ अध्यापक: 43,314 पद रिक्त

-व्याख्याता (विभिन्न विषय): 20,438 पद रिक्त

-प्रधानाचार्य एवं समकक्ष: 6,015 पद रिक्त

-बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक: 3,699 पद रिक्त

-उप प्राचार्य एवं समकक्ष: 1,135 पद रिक्त

-शारीरिक शिक्षक (तृतीय व वरिष्ठ श्रेणी): 3,010 पद रिक्त

क्रमोन्नत स्कूलों और प्रयोगशालाओं का बुरा हाल:-

स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर तब हो जाती है जब हम हाल ही में क्रमोन्नत हुए विद्यालयों को देखते हैं। इन स्कूलों में करीब 11 हजार व्याख्याता पद अब तक स्वीकृत ही नहीं किए गए हैं। यदि इन पदों को भी जोड़ दिया जाए, तो कुल रिक्तियों का आंकड़ा 1.30 लाख पार कर जाता है। प्रशासनिक स्तर पर जिला शिक्षा अधिकारी के 168, उप निदेशक के 21 और संयुक्त निदेशक के 7 पद खाली हैं।

इसके अलावा, स्कूलों में केवल शिक्षकों की ही नहीं, बल्कि पुस्तकालयाध्यक्ष और कोच के 1,755 पद तथा प्रयोगशाला सहायकों के 1,583 पद खाली होने से बच्चों का प्रैक्टिकल ज्ञान और खेलकूद भी ठप पड़ा है। मंत्रालयिक संवर्ग में भी 35 हजार से अधिक पद खाली हैं, जिसके कारण संस्थापन अधिकारी से लेकर सहायक कर्मचारी तक का काम प्रभावित हो रहा है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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