Expose Now Exclusive Report: पानी सिर से ऊपर… 17 जून तक भुगतान नहीं तो राजस्थान में ठप होगी जलापूर्ति!

-PHED कांट्रैक्टर्स का आर-पार का एलान, नए टेंडर्स का पूर्ण बहिष्कार, संचालन-संधारण कार्य भी होगा बंद

-संघर्ष समिति की चेतावनी के बाद हरकत में आए जलदाय मंत्री, वित्त सचिव को फोन कर कहा— “इनका भुगतान करो, पानी सिर से ऊपर निकल चुका है”

जयपुर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के संवेदकों (ठेकेदारों) के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है। पिछले तीन वर्षों से लंबित करोड़ों रुपये के बकाया भुगतान और अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर ‘आल राजस्थान PHED कांट्रेक्टर एसोसिएशन’ के बैनर तले बनी संघर्ष समिति ने सरकार के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। संवेदकों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 17 जून 2026 तक उनके बकाए का निस्तारण नहीं हुआ, तो पूरे प्रदेश में पानी की आपूर्ति, संचालन और रख-रखाव (O&M) से जुड़े तमाम कार्य पूरी तरह ठप कर दिए जाएंगे —जिसकी समस्त जिम्मेदारी विभाग और राज्य सरकार की होगी।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

भुगतान को लेकर PHED मंत्री के पास नहीं था जवाब, तो वित्त सचिव लगा दिया फोन:-

ज्ञापन सौंपने के दौरान हालात की गंभीरता को देखते हुए जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल के सामने ही वित्त विभाग के उच्च अधिकारियों को फोन मिलाया। विभाग की सुस्ती और संवेदकों के गंभीर वित्तीय संकट को भांपते हुए मंत्री ने कहा, “इनका भुगतान करो, पानी सिर से ऊपर निकल चुका है।” इस वार्ता के तुरंत बाद संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल वित्त सचिव वैभव गालरिया से भी मिला। संवेदकों ने शासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दे दिया है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो राजस्थान का कोई भी ठेकेदार किसी भी नवीन निविदा (Tender) प्रक्रिया में भाग नहीं लेगा और चालू परियोजनाओं का काम भी रोक दिया जाएगा।

‘Ways & Means’ के फेर में अटका पैसा, संवेदक झेल रहे आर्थिक मंदी:-

संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई ने बताया कि विगत तीन वर्षों से भुगतान अटकने के कारण ठेकेदार गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं । स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि:

22 अप्रैल के समझौते को हवा में उड़ाने का आरोप:-

संवेदकों का आरोप है कि इससे पहले 22 अप्रैल 2026 को भी जलदाय मंत्री की अध्यक्षता में समझौता वार्ता हुई थी, जिसमें 300 करोड़ के भुगतान और सुरक्षा जमा राशि (Security Deposit) को 10% से घटाकर 3% करने जैसी सहमति बनी थी। लेकिन विभाग ने अगले ही दिन उन व्यवस्थाओं को निरस्त कर दिया। बार-बार केवल खोखले आश्वासन मिलने के कारण अब ठेकेदारों ने “भुगतान नहीं तो काम नहीं” का अंतिम रास्ता चुना है। इस पूरे मामले की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मुख्य सचिव को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी जा चुकी है। देखना यह है कि क्या मंत्री की इस कड़क हिदायत के बाद वित्त विभाग जागता है, या फिर 17 जून के बाद पूरा राजस्थान बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर होगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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