राजस्थान में करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा: कजाकिस्तान से MBBS कर चुके युवक समेत दो गिरफ्तार, 100 से अधिक केस दर्ज

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जिला दक्षिण पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुका एक युवक भी शामिल है। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह देशभर में फैले साइबर अपराधों में सक्रिय था और इसके खिलाफ 100 से अधिक शिकायतें व मामले दर्ज हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बाड़मेर निवासी गणेश चौधरी (29) और जयपुर के हसनपुरा निवासी दुष्यन्त जांगिड़ (32) के रूप में हुई है। वहीं गिरोह का मुख्य सरगना सुनील विश्नोई उर्फ कार्तिक अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

महिला डॉक्टर से 24 लाख रुपये की ठगी से खुला राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब जयपुर निवासी महिला डॉक्टर सुरेखा लोढ़ा ने श्याम नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार दिसंबर 2025 में साइबर ठगों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया।

आरोपियों ने महिला डॉक्टर और उनके परिवार को गंभीर कानूनी कार्रवाई तथा जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद उन्हें तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखते हुए मानसिक दबाव बनाया गया और 24 लाख रुपये एक फर्जी कंपनी के खाते में ट्रांसफर करवा लिए।

शिकायत मिलने के बाद श्याम नगर थाना पुलिस, जिला विशेष टीम (DST) और साइबर सेल ने संयुक्त जांच शुरू की।

तकनीकी जांच से पकड़े गए आरोपी

श्याम नगर थानाधिकारी दलबीर सिंह, डीएसटी प्रभारी विशम्भर दयाल और साइबर सेल के हेड कांस्टेबल लोकेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल ट्रांजेक्शन की गहन जांच की।

तकनीकी विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही और दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

मेडिकल नेटवर्क के जरिए चल रहा था साइबर फ्रॉड

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी और फरार सरगना दोनों कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर चुके हैं। विदेश में पढ़ाई के दौरान बने मेडिकल नेटवर्क का इस्तेमाल कर वे विभिन्न देशों और राज्यों में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों तक पहुंच बनाते थे।

गिरोह सक्रिय बैंक खातों को किराये पर लेने, फर्जी दस्तावेजों के जरिए खाते खुलवाने और उन खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर करने का काम करता था। इसके बाद पैसे को कई खातों में घुमाकर उसकी ट्रैकिंग मुश्किल बनाई जाती थी।

क्रिप्टोकरेंसी में बदल दी जाती थी ठगी की रकम

पुलिस के अनुसार साइबर ठगी से प्राप्त रकम को बाद में यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टोकरेंसी खरीदने में इस्तेमाल किया जाता था। आरोपी कम कीमत पर क्रिप्टो खरीदकर उसे ऊंचे दामों पर बेचते थे और इस प्रक्रिया के जरिए अवैध धन को वैध दिखाने की कोशिश करते थे।

इस तरह गिरोह साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के दोहरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

कई राज्यों में दर्ज हैं 100 से ज्यादा मामले

पुलिस को आरोपियों से बरामद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइसों की जांच में पता चला है कि गिरोह के खिलाफ राजस्थान सहित दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 100 से अधिक साइबर शिकायतें और मामले दर्ज हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे चुका है।

पूछताछ में हो सकते हैं बड़े खुलासे

जयपुर पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अन्य साइबर अपराधियों, बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और क्रिप्टो ट्रांजेक्शन नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। पुलिस फरार सरगना सुनील विश्नोई की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में देशव्यापी साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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