धौलपुर में घूसखोर डॉक्टर पर कानूनी शिकंजा: एक्सीडेंट केस में चोट प्रतिवेदन (MLC) बनाने के नाम पर ₹4,000 की रिश्वत मांगना पड़ा भारी

धौलपुर/बाड़ी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की धौलपुर इकाई ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बाड़ी स्थित राजकीय सामान्य चिकित्सालय में तैनात मेडिकल ज्यूरिस्ट (वरिष्ठ विशेषज्ञ ENT) के खिलाफ रिश्वत मांगने का संगीन मामला दर्ज किया है. आरोपी डॉक्टर महेशचन्द गुप्ता ने एक सड़क दुर्घटना के मामले में पीड़ित की चोट प्रतिवेदन (मेडिकल रिपोर्ट/MLC) तैयार करने की एवज में रिश्वत की मांग की थी. एसीबी ने गोपनीय वॉयस रिकॉर्डिंग और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है.

पिता के एक्सीडेंट की मेडिकल रिपोर्ट के बदले मांगे थे पैसे

यह मामला बाड़ी के कायस्थपाड़ा निवासी परिवादी सूरज कुशवाह से जुड़ा है. सूरज के पिताजी बाबूलाल 21 फरवरी 2026 को एक सड़क दुर्घटना में चोटिल हो गए थे, जिस संबंध में बाड़ी सदर थाने में मुकदमा नंबर 58/2026 दर्ज किया गया था. इस मुकदमे के कानूनी अनुसंधान के लिए बाबूलाल की एमएलसी (चोट प्रतिवेदन) तैयार होनी थी.

जब परिवादी अस्पताल पहुंचा, तो वहां तैनात मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. महेशचन्द गुप्ता ने रिपोर्ट तैयार करने की एवज में ₹5,000 की रिश्वत मांग कर दी. परिवादी रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने 7 मार्च 2026 को जयपुर एसीबी की हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई.

एसीबी के वॉयस रिकॉर्डर में कैद हुई डॉक्टर की सौदेबाजी

शिकायत मिलने पर धौलपुर एसीबी के उप अधीक्षक ज्ञानचन्द के निर्देशन में हेड कांस्टेबल श्रीकांत कटारा और कांस्टेबल योगेश सिंह को गोपनीय सत्यापन के लिए बाड़ी भेजा गया. एसीबी टीम ने परिवादी सूरज को एक डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर देकर डॉक्टर के सरकारी आवास पर भेजा.

सरकारी आवास पर हुई बातचीत के दौरान डॉ. महेशचन्द गुप्ता ने परिवादी से ₹5,000 की घूस मांगी. परिवादी द्वारा काफी हाथाजोड़ी करने और रकम कम करने के निवेदन पर डॉक्टर अंततः ₹4,000 की रिश्वत लेने पर सहमत हो गया और कहा कि पैसे देने के बाद ही चोट प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा. यह पूरी बातचीत एसीबी के रिकॉर्डर में डिजिटल साक्ष्य के रूप में दर्ज हो गई.

भनक लगते ही डॉक्टर गया लंबी छुट्टी पर, ट्रैप की कार्रवाई रही असफल

12 मार्च 2026 को एसीबी टीम ने जिला परिषद धौलपुर के दो स्वतंत्र गवाहों (प्रशासनिक अधिकारी संदीप तंवर और कनिष्ठ सहायक जय सिंह) को साथ लेकर डॉक्टर को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया. केमिकल पाउडर लगे ₹4,000 देकर परिवादी को तैयार किया गया.

परंतु, जब परिवादी ने अस्पताल और डॉक्टर के आवास पर पता किया, तो सामने आया कि डॉ. महेशचन्द गुप्ता ड्यूटी पर नहीं आए हैं और अवकाश पर चले गए हैं. इस वजह से उस दिन रंगे हाथों पकड़ने (ट्रेप) की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी और केमिकल लगे नोट मालखाने में सुरक्षित रखवा दिए गए.

बाद में परिवादी ने कई बार अस्पताल के चक्कर काटे, लेकिन डॉक्टर लंबे अवकाश पर ही रहे और उन्होंने परिवादी का फोन उठाना भी बंद कर दिया. पुलिस और एसीबी अधिकारियों को अंदेशा है कि डॉक्टर को अपने ऊपर एसीबी की निगरानी होने का शक हो गया था, जिसके कारण वह छिप रहा था और घूस की रकम लेने से बच रहा था.

पढ़े पूरी FIR..

दूसरे डॉक्टर से बनवाई रिपोर्ट, आरोपी डॉक्टर पर केस दर्ज

थाना सदर बाड़ी के जांच अधिकारी द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने के कारण परिवादी ने आखिरकार 19 मार्च 2026 को बाड़ी अस्पताल के ही दूसरे मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. आनंद वर्मा से अपने पिता का मेडिकल मुआयना करवाकर रिपोर्ट तैयार करवाई और उसे थाने भिजवाया. इसके बाद परिवादी ने एसीबी कार्यालय आकर अपनी पेश की हुई रिश्वत राशि वापस लौटाने का अनुरोध किया, जिसके बाद स्वतंत्र गवाहों के समक्ष नोटों को साफ कर परिवादी को उसके ₹4,000 वापस सौंप दिए गए.

हालांकि, रंगे हाथों गिरफ्तारी न होने के बावजूद, 7 मार्च 2026 को की गई वॉयस रिकॉर्डिंग के जरिए डॉ. महेशचन्द गुप्ता द्वारा ₹4,000 की रिश्वत मांगने की पुष्टि पूरी तरह से प्रमाणित हो चुकी थी.

इस पुख्ता वॉयस साक्ष्य और डंपिंग फर्द के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जयपुर के पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग के आदेशानुसार आरोपी डॉ. महेशचन्द गुप्ता (पुत्र लक्ष्मीचन्द गुप्ता, निवासी वजीरपुर, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत एफआईआर संख्या 134/2026 दर्ज कर ली गई है. इस मामले की आगामी विस्तृत जांच भरतपुर एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अपर पुलिस अधीक्षक) श्री अमित सिंह को सौंपी गई है.

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