Expose Now खोजी रिपोर्ट
जयपुर। राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में इस वक्त एक ऐसा ज्वालामुखी सुलग रहा है, जो कभी भी सूबे की जलापूर्ति व्यवस्था को ठप कर सकता है। प्रदेश के कोने-कोने में अपनी जमीन, जेवर और घर गिरवी रखकर जनता तक पानी पहुंचाने वाले PHED ठेकेदारों का करीब 4500 करोड़ रुपए का भुगतान सरकार के पास अटका पड़ा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई ठेकेदारों के घरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं, मजदूरों को देने के लिए पैसे नहीं हैं और बैंक के ब्याज का कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है।
इस भारी संकट के बीच अब ठेकेदारों के आंदोलन को कुचलने और उसमें फूट डालने की एक बहुत बड़ी अंदरूनी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। ‘All Rajasthan PHED Contract Association’ की संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश विश्नोई के एक भावुक और आक्रोशित संदेश ने ठेकेदारों से लेकर PHED में कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

आंदोलन के पीछे ‘विभीषण’ कौन? क्या अपनों ने ही की गद्दारी?
ठेकेदारों के इस न्यायसंगत आंदोलन के बीच सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर वो कौन सी ताकतें हैं जो इस आंदोलन को खत्म करना चाहती हैं?
सूत्रों के हवाले से जो बड़ी बातें सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं:
-विभाग के कुछ रसूखदार ठेकेदारों पर शक: चर्चा तेज है कि PHED के ही कुछ बड़े और रसूखदार ठेकेदार, जो अधिकारियों और सरकार के करीबी हैं, अपने निजी स्वार्थ के लिए इस आंदोलन की धार को कमजोर करने में लगे हैं। वे आम ठेकेदारों में फूट डालने और अफवाहें फैलाने का काम कर रहे हैं।
-सरकार और प्रशासन का दबाव: क्या सरकार और विभाग के आला अधिकारी अपनी नाकामी छुपाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल कर रहे हैं? ठेकेदारों को डराकर या छोटे-मोटे आश्वसन देकर आंदोलन को बिखेरने की कोशिशें की जा रही हैं।
“हम टूटेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं”, संघर्ष समिति अध्यक्ष की हुंकार:-
चोट जब आत्मसम्मान और पेट पर लगी हो, तो लड़ाई लंबी खींचती है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश विश्नोई ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अब आर-पार की है। उन्होंने सभी ठेकेदारों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा है कि “मेहनत हमारी, पसीना हमारा, घर-बार गिरवी रखकर हमने सरकार का काम पूरा किया। पर अफसोस, आज हमारे ही 4500 करोड़ रुपए अटके पड़े हैं। मजदूर का हिसाब बाकी है, बच्चों की फीस रुकी है। लेकिन याद रखना – अंधेरी रात के बाद सवेरा जरूर आता है। हम टूटेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं। अफवाहों से बचो, आपस में फूट मत डालो। हमारी ताकत हमारी एकता है।”
सवालों के घेरे में सरकार, जनता को पानी पिलाया, बदले में मिले खून के आंसू:-
जलदाय विभाग और सरकार के पास बजट नहीं था, तो फिर हजारों करोड़ की योजनाएं शुरू कर वाहवाही लूटने की जरूरत क्या थी, क्यों प्रदेश के सैकड़ों ठेकेदारों को गुमराह कर उन्हें कर्जदार बनाया गया। जब ठेकेदारों से करोड़ों रूपए लगाकर योजनाओं को शुरू कर दिया, तो फिर सरकार उनका भुगतान क्यों नहीं कर रही है। काम में देरी पर सरकार ने ठेकेदारों पर पैनल्टी लगाई है तो क्या अब भुगतान में देरी पर ठेकेदारों को ब्याज देगी सरकार। इस पूरे मामले में सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
पूछता है Expose Now :

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now