करौली: करौली मेडिकल कॉलेज में कार्यरत संविदा लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ इन दिनों भारी संकट से गुजर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य द्वारा दो दिन पूर्व अचानक जारी किए गए सेवा समाप्ति के आदेश के बाद लगभग 80 युवा बेरोजगार हो गए हैं और अब वे न्याय के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं।
घटनाक्रम और युवाओं की प्रमुख मांगें:
- अधिकारियों और नेताओं से गुहार: बेरोजगार हुए इन युवाओं ने जिला कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में तैनात अफसरों और मंत्रियों तक अपनी आवाज पहुंचाई है। शुक्रवार को उन्होंने करौली की पूर्व विधायक महारानी रोहिणी कुमारी से भी मुलाकात कर सेवा बहाली की मांग का ज्ञापन सौंपा।
- प्राचार्य का आदेश बना मुसीबत: युवाओं का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य रमेश मीना द्वारा अचानक लिए गए इस फैसले ने उनके परिवारों के सामने भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
- शोषण और टूटी उम्मीदें: कार्मिकों के अनुसार, उन्होंने वर्षों तक अल्प वेतन पर पूरी निष्ठा से काम किया। उन्हें उम्मीद थी कि बजट 2025 की घोषणाओं के अनुरूप राजकीय संस्था का गठन कर उन्हें नियोजित किया जाएगा। साथ ही, केंद्र सरकार के श्रम संहिता कानून से भी उन्हें राहत की आस थी, लेकिन इसके विपरीत उन्हें नौकरी से ही निकाल दिया गया।
- जयपुर तक पहुंचा मामला: इन कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल जयपुर पहुंचा और कई मंत्रियों व विधायकों को अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने भाजपा नेता अशोक पाठक से भी मुलाकात की, जिसके बाद पाठक ने मुख्यमंत्री, मंत्री और विभाग की प्रमुख शासन सचिव से इन युवाओं के पद बढ़ाने या उन्हें पुनः रोजगार देने की मांग की है।

युवाओं की स्पष्ट मांग है कि उनके सेवा समाप्ति के आदेशों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए और उन्हें वापस उनके पदों पर बहाल किया जाए।
