जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े 979.27 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल के खिलाफ अदालत में चालान (चार्जशीट) पेश कर दिया है। सुबोध अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर चहेतों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि, इस मामले में अभी कई बड़े नामों पर जांच जारी है।
दिल्ली से हुई थी सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी

जल जीवन मिशन के तहत जारी किए गए टेंडरों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच करते हुए ACB ने महीनों तक फाइलों और वित्तीय रिकॉर्ड्स को खंगाला। इसी कड़ी में ठोस सुबूत मिलने के बाद ACB ने 9 अप्रैल को रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ और दस्तावेजों की लंबी पड़ताल के बाद अब जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ चालान पेश कर दिया है, जिससे यह मामला एक नए और अहम चरण में पहुंच गया है।
इन बड़े नामों पर अभी लटकी है तलवार
एसीबी की जांच केवल सुबोध अग्रवाल तक ही सीमित नहीं है। पूर्व मंत्री महेश जोशी, संजय बड़ाया और कुछ अन्य प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर अभी जांच लंबित रखी गई है। एजेंसी इन सभी पहलुओं पर गहनता से साक्ष्य जुटा रही है।

कई आरोपियों पर पहले ही हो चुकी है कार्रवाई
सुबोध अग्रवाल से पहले भी ACB कई लोगों पर शिकंजा कस चुकी है। जांच एजेंसी द्वारा मामले में पूर्व में दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डीके गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी, मुकेश पाठक और निरिल कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
तीन आरोपी अब भी फरार, वारंट जारी
इस 979 करोड़ रुपये के घोटाले में कुछ आरोपी अभी भी कानून की पकड़ से दूर हैं। जितेन्द्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता के खिलाफ कोर्ट से स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं। ACB इन फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
अक्टूबर में दर्ज हुआ था मामला, जमानत पर सुनवाई अटकी
जल जीवन मिशन के टेंडरों में धांधली को लेकर ACB ने प्रारंभिक जांच के बाद 30 अक्टूबर 2024 को आधिकारिक रूप से मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियों का दौर चला। दूसरी ओर, गिरफ्तार पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की जमानत याचिका पर फिलहाल सुनवाई नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट प्रशासन से केस ट्रांसफर नहीं होने के कारण उनकी जमानत याचिका पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। फिलहाल सभी की निगाहें ACB की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
