-केंद्र से पैसा मिलने में देरी और ‘SNA स्पर्श पोर्टल’ के फेर में फंसा बजट, परियोजनाओं की रफ्तार बनाए रखने के लिए वित्त विभाग ने दी बड़ी छूट
-देरी पर काटी गई 70% LD ठेकेदारों को एकमुश्त वापस करेगी सरकार, फिर विभाग में जमा ‘पास रनिंग बिलों’ से होगी रिकवरी
जयपुर। राजस्थान में आम जनता से जुड़ी सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) इस समय भारी बजटीय संकट और प्रशासनिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि में देरी और विभाग में ‘SNA से SNA SPARSH’ ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया जारी होने के कारण बजट आवंटन ठप पड़ा है। इस गंभीर वित्तीय संकट के कारण मैदान में काम कर रहे ठेकेदारों के सामने नकदी (Liquidity) का बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जिससे पेयजल परियोजनाओं की भौतिक प्रगति पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
इस संकट से निपटने और परियोजनाओं को दम तोड़ने से बचाने के लिए वित्त विभाग और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने एक चौंकाने वाला ‘अस्थायी वन-टाइम फॉर्मूला’ निकाला है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता (JJM) द्वारा जारी एक हालिया आदेश (दिनांक 03/06/2026) के अनुसार, सरकार उन ठेकेदारों को बड़ी राहत देने जा रही है जिन पर काम में देरी के लिए जुर्माना लगाया गया था।

ये है सरकार का ‘राहत फॉर्मूला’:-
आदेश के मुताबिक, जल जीवन मिशन के तहत जिन ठेकेदारों द्वारा काम में देरी करने पर GCC (PWF&AR) के क्लॉज-2 के तहत ‘लिक्विडेटेड डैमेजेस’ (LD) की कटौती की गई थी, उन्हें अब उस काटी गई राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा एकबारीय (One-Time) रिफंड (प्रतिदाय) के रूप में वापस किया जाएगा। वित्त विभाग ने अपनी आईडी संख्या 262600053 (दिनांक 29.05.2026) के जरिए इस वित्तीय ढील को मंजूरी दी है। वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव (वित्तीय नियम) महेंद्र मोहन और PHED के अधिकारियों के अनुसार, चूंकि यह योजना सीधे जनता से जुड़ी है और इसे समय पर पूरा करना आवश्यक है, इसलिए ठेकेदारों की नकदी की गंभीर समस्या को देखते हुए यह अस्थायी रास्ता चुना गया है।

शर्तें कड़क, राज्य हित को नुकसान हुआ तो खैर नहीं:-
भले ही सरकार ठेकेदारों को राहत दे रही है, लेकिन विभाग ने खुद को सुरक्षित रखने के लिए बेहद कड़े नियम और शर्तें भी तय की हैं:
-बिल देखकर ही मिलेगा रिफंड: यह रिफंड केवल उन्हीं ठेकेदारों को मिलेगा, जिनके थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसी (TPIA) द्वारा प्रमाणित और पास किए गए रनिंग बिल (Running Bills) वर्तमान में खण्डीय कार्यालय में उपलब्ध हैं।
-कटौतियों के बाद बची राशि ही मिलेगी: ठेकेदार के पास बिलों में से सभी वैधानिक कटौतियां (जैसे GST, इनकम टैक्स, परफॉर्मेंस सिक्योरिटी आदि) काटने के बाद बची हुई राशि या काटी गई LD का 70% हिस्सा—दोनों में से जो भी कम होगा, केवल उतनी ही राशि जारी की जाएगी।
-500 के स्टाम्प पर ‘नो ऑब्जेक्शन’ शपथ पत्र: ठेकेदार को 500 के गैर-न्यायिक स्टाम्प पर नोटरीकृत शपथ-पत्र देना होगा कि सरकार अगर इस रिफंड राशि की वसूली उसके लंबित TPIA पास बिलों से करती है, तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी और वह कोई कोर्ट केस या दावा नहीं करेगा।
-विवादित ठेकेदारों के लिए रास्ते बंद: जिन परियोजनाओं में ठेकेदार और विभाग के बीच कोई कोर्ट केस लंबित है, विवाद चल रहा है, या जिन ठेकेदारों के कार्यादेश को निरस्त (Rescind) करने की प्रक्रिया चल रही है, उन्हें इस योजना के तहत फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी।
बजट आते ही वापस सरकारी खजाने में जाएगी राशि:-
विभाग ने साफ किया है कि जैसे ही आगामी दिनों में प्रथम बजट आवंटन प्राप्त होगा, इस जारी की गई रिफंड राशि की शत-प्रतिशत वसूली कर उसे वापस ‘सिक्योरिटी डिपॉजिट V’ (Security Deposit V) खाते में जमा करा दिया जाएगा, ताकि राज्य सरकार के राजस्व को कोई नुकसान न हो। मुख्य अभियंता ने सभी अतिरिक्त, अधीक्षण और अधिशाषी अभियंताओं को इस आदेश की पालना सख्ती से सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
