जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) ने विद्युत चोरी से संबंधित सतर्कता जांच प्रकरणों (VCR) के निपटारे के संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं । राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) द्वारा याचिका संख्या RERC/2398/2026 पर दिए गए निर्देशों के बाद निगम ने अपने पुराने आदेशों में आंशिक संशोधन किया है । इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उन उपभोक्ताओं को मिलेगा जिन पर बिजली चोरी के मामले दर्ज हैं ।
अपील की समय सीमा अब 60 दिन
निगम के अधीक्षण अभियन्ता (वाणिज्य) टी.सी. सिंघल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 और 138 के तहत सतर्कता जांच प्रतिवेदन (VCR) के खिलाफ अब उपभोक्ता 60 दिन के भीतर अपील दायर कर सकेंगे । इससे पहले यह समय सीमा केवल 30 दिवस की थी । समय सीमा बढ़ने से उपभोक्ताओं को राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए अधिक समय मिल सकेगा ।

पुराने लंबित मामलों के लिए ‘अंतिम अवसर’
आदेश में उन उपभोक्ताओं और गैर-उपभोक्ताओं के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है, जो पूर्व में निर्धारित समय सीमा के भीतर अपील नहीं कर पाए थे ।
- सुनवाई का मौका: ऐसे लंबित प्रकरण जिन्हें पूर्व में निर्धारित समय के भीतर दर्ज नहीं कराया जा सका और जिनमें सुनवाई का अवसर नहीं मिला था, उन्हें एक अंतिम मौका प्रदान किया गया है ।
- आवेदन की अवधि: ऐसे प्रकरणों के लिए आवेदन करने की समय सीमा आदेश जारी होने की तिथि (28 अप्रैल 2026) से आगामी 30 दिनों तक प्रभावी रहेगी ।
- पात्रता: यह छूट केवल उन विद्युत चोरी के मामलों के लिए मान्य होगी जिन्हें पूर्व में विभाग द्वारा नहीं सुना गया है ।
आदेश के मुख्य बिंदु: एक नजर में
| विवरण | नई व्यवस्था / प्रावधान |
| अपील की नई समय सीमा | नोटिस जारी होने की तिथि से 60 दिन |
| लंबित केसों के लिए विंडो | आदेश की तिथि से 30 दिन के भीतर आवेदन |
| संबंधित धाराएं | विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 एवं 138 |
| सक्षम प्राधिकारी | राजस्व निर्धारण पुनरीक्षण समिति |
| निर्णय का आधार | RERC का आदेश दिनांक 15.04.2026 |
अधिकारियों को सख्त पालना के निर्देश
निगम ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश जयपुर डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी सर्किलों में तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा । इस निर्णय से उन हजारों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके मामले तकनीकी कारणों या समय की कमी की वजह से लंबित पड़े थे ।
