सरकारी इमारतों पर सोलर पैनल लगाने के नाम पर हुए करीब 46 करोड़ रुपये के फर्जी बैंक गारंटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपना शिकंजा कस दिया है। ईडी ने राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अधिकारियों को दिल्ली बुलाकर लंबी पूछताछ की है और मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी तलब किए हैं। यह पूरा मामला एक निजी कंपनी द्वारा जाली बैंक गारंटी पेश कर सरकार से करोड़ों रुपये का एडवांस भुगतान हासिल करने से जुड़ा है। पुलिस इस प्रकरण में कंपनी के मालिक को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन अब ईडी द्वारा आर्थिक लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया की गहन जांच शुरू करने से विभाग के संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों में भारी हड़कंप मचा हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बावजूद अब तक विभागीय जांच अधूरी है। मामले की जांच के लिए अब तक दो कमेटियां गठित की जा चुकी हैं, लेकिन किसी ने भी अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट नहीं की है। पहली कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद दूसरी कमेटी बनाई गई थी, जिसकी जांच भी अब तक लंबित है। ऊर्जा विभाग की इस सुस्ती पर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या जिम्मेदार चेहरों को बचाने की कोशिश की जा रही है? अब ईडी की एंट्री के बाद इस जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है, जिससे घोटाले में पर्दे के पीछे शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जल्द ही सामने आ सकती है।
