घर में मंदिर की सही दिशा क्यों है जरूरी? जानिए क्यों ईशान कोण को माना गया है पूजा का सबसे श्रेष्ठ स्थान

मंदिर की श्रेष्ठ दिशा ईशान कोण ही क्यों

वास्तु शास्त्र में पूजा घर को घर का सबसे पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना गया है। जैसे हमारे शरीर के संचालन के लिए ‘हृदय’ सबसे महत्वपूर्ण है, वैसे ही घर की सुख-शांति और समृद्धि के लिए ‘मंदिर’ की दिशा सबसे मायने रखती है। घर में मंदिर की सही दिशा होने का हमारी जिंदगी पर गहराई से प्रभाव पड़ता है

यदि पूजा घर गलत दिशा में बना हो तो क्या आपने सोचा है कि रोज पूजा करने के बाद भी मन अशांत रह सकता है, ग्रहों की शांति या उनके शुभ परिणामों में कमी आ सकती है, मानसिक अस्थिरता, बड़ी बीमारियां, धन की समस्या, निर्णय शक्ति कमजोर और बच्चों की पढ़ाई में भी रुकावट देखने को मिल सकती है। क्या इनका संबंध आपके मंदिर की दिशा से भी हो सकता है। जब पूर्व दिशा भी शुभ है और उत्तर दिशा भी शुभ है तो फिर वास्तु शास्त्र ईशान कोण को ही पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान क्यों मानता है।

पूर्व दिशा सूर्य का उदय स्थान है। यह दिशा ज्ञान, यश, ऊर्जा, आत्मविश्वास और नई शुरुआत प्रदान करती है। यहां से सामाजिक संबंध, मान-सम्मान और स्वास्थ्य देखने को मिलता है। पूर्व में मंदिर रखने से आरोग्य और सामाजिक दायरा तो बढ़ता है लेकिन यहां पर आध्यात्मिकता से ज्यादा कर्म और ऊर्जा की अधिकता देखने को मिलती है क्योंकि यह दिशा इंद्र और सूर्य देव से शासित है।  

उत्तर दिशा यह कुबेर की दिशा और बुध ग्रह से शासित है। यह दिशा मुख्य रूप से बड़े अवसर, धन प्रवाह और कैरियर से जुड़ी है। उत्तर दिशा में मंदिर बना सकते हैं लेकिन यहां की ऊर्जा भौतिक विकास की ओर ज्यादा आकर्षित करती है और आध्यात्मिक विकास की ओर कम।

ईशान कोण– उत्तर और पूर्व के बीच का कोण ईशान कोण के नाम से जाना जाता है। ईशान कोण के स्वामी भगवान शिव है। यह दिशा सबसे पवित्र और श्रेष्ठ मानी जाती है। वास्तु देवता का सिर भी ईशान कोण में ही विद्यमान है। ये सिर निर्णय क्षमता, विचार, मानसिक शांति और चेतना का केंद्र है। सिर वाले स्थान यानि ईशान कोण में सार्थकता, शांति और ध्यान केंद्रित करने वाली ऊर्जा के साथ ही मन में ठहराव और शीतलता भी देखने को मिलती है। यह दिशा भौतिकता से ऊपर उठकर आध्यात्मिक शांति, ज्ञान और स्पष्ट सोच की ओर आकर्षित करती है। उत्तर दिशा धनदायक और पूर्व दिशा आपको प्रसिद्ध देती है लेकिन ईशान कोण बुद्धि, विवेक और शांति प्रदान करने वाली दिशा है और बिना सही बुद्धि और शांति के धन और नाम दोनों ही लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सकते। इसलिए ईशान कोण मंदिर स्थापना के लिये सर्वोच्च माना गया है। यहां मंदिर होने पर व्यक्ति व्यापार के साथ ही जीवन में भी शांत और स्थिर दिमाग से फैसले लेता है, व्यर्थ के अवसाद से मुक्ति मिलती है।

Note- यह लेख वास्तु के दृष्टिकोण पर आधारित है । जो आपके वास्तु विषयक ज्ञान को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।


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