जयपुर: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान संपन्न होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बदल दी है। परिणाम आने में अभी समय है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव के ठीक बाद ‘बाड़ेबंदी’ की राजनीति शुरू कर दी है। 162 निकायों के लिए हुए मतदान के बाद स्थानीय आकलन और करीबी मुकाबलों की आशंका को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने रातों-रात अपने प्रत्याशियों को समेटना शुरू कर दिया है।
निर्दलीय और बागियों पर खास नजर
चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में निर्दलीय और बागी उम्मीदवार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसी गणित को ध्यान में रखते हुए भाजपा और कांग्रेस दो स्तरों पर काम कर रही हैं:
- प्रत्याशियों को सुरक्षित रखना: अपने अधिकृत उम्मीदवारों को विरोधी खेमे की सेंधमारी से बचाने के लिए उन्हें गुप्त स्थानों, होटलों और रिसॉर्ट्स में भेजा जा रहा है।
- निर्दलियों से संपर्क: जिन सीटों पर कड़ा मुकाबला है, वहां जीतने की संभावना वाले निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधा जा रहा है ताकि बोर्ड गठन में आसानी हो।
विभिन्न जिलों में तेजी से बदले समीकरण
- भीलवाड़ा: भाजपा ने नगर निगम चुनाव के अपने सभी 70 प्रत्याशियों को बुधवार रात ही पार्टी कार्यालय बुला लिया और सुरक्षित ठिकानों की ओर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की।
- रामगंजमंडी (कोटा): भाजपा अपने प्रत्याशियों और 3 निर्दलियों (कुल 39 लोग) को खैराबाद ले गई, जबकि कांग्रेस अपने 35 प्रत्याशियों और 2 निर्दलियों को लेकर झालावाड़ रवाना हुई।
- अन्य जिले: श्रीगंगानगर, बाड़मेर, सिरोही, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, अलवर, सीकर (पलसाना) और दौसा के महवा में भी प्रत्याशियों को रातों-रात एकजुट करने की खबरें सामने आई हैं।
मतगणना 14 सितंबर को होगी, जिसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि किस दल का बोर्ड बनेगा, लेकिन फिलहाल मुकाबला मतदान केंद्रों से निकलकर राजनीतिक दलों के ‘नंबर गेम’ और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच गया है।