-वित्त विभाग की फाइलों में फंसा बेरोजगारों का हक; 17 जिलों में मार्च के बाद से फूटी कौड़ी नहीं पहुंची
-हर महीने 60 करोड़ खर्च का दावा, जमीन पर महीनों से इंतजार; राजस्थान युवा बेरोजगार महासंघ ने उठाई 10 लाख युवाओं को जोड़ने की मांग
जयपुर। प्रदेश में बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री युवा संबल योजना’ विभागीय लेटलतीफी और सरकारी अनदेखी की शिकार हो गई है। प्रदेश के करीब 2 लाख शिक्षित बेरोजगार पिछले 7 महीनों से अपने भत्ते की राह देख रहे हैं। रोजगार निदेशालय द्वारा बिल तैयार कर वित्त विभाग को भेजे जा चुके हैं, लेकिन बजट जारी न होने से युवाओं के खातों में राशि नहीं पहुंच पा रही है।
आधे राजस्थान में 7 महीने से सूखा,17 जिलों के युवा परेशान:-
राज्य के लगभग आधे हिस्से में मार्च महीने के बाद से कोई भुगतान नहीं हुआ है। खासकर नागौर, कुचामन-डीडवाना, अजमेर, बारां, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, झालावाड़, कोटा, पाली, सवाई माधोपुर, टोंक, उदयपुर, बाड़मेर, जैसलमेर-फलौदी और सलूंबर जैसे 17 जिलों के युवा गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
योजना का गणित और सरकार का भार:
-पात्रता व राशि: योजना के तहत सामान्य बेरोजगार पुरुषों को प्रतिमाह ₹4,000 तथा महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को 4,500 दिए जाने का प्रावधान है।
-बजट: हर महीने सरकार इस योजना पर लगभग 60 करोड़ का खर्च वहन करती है।
-अवधि: यह लाभ किसी भी बेरोजगार को अधिकतम 2 वर्ष अथवा रोजगार मिलने तक ही मिलता है।
बेरोजगार महासंघ की चेतावनी और मांग:-
राजस्थान युवा बेरोजगार महासंघ के अध्यक्ष राधे मीणा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि
“कई जिलों में पिछले 5 से 7 महीनों से भत्ता नहीं मिला है। सरकार तत्काल प्रभाव से अटका हुआ बेरोजगारी भत्ता जारी करे। प्रदेश में करीब 40 लाख बेरोजगार हैं, ऐसे में इस योजना का दायरा 2 लाख से बढ़ाकर कम से कम 10 लाख युवाओं तक किया जाना चाहिए।”
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now