राजस्थान विधानसभा सत्र संपन्न: 184 घंटे की चर्चा और 10 बड़े बदलाव, जानें क्या हुआ खास

Rakhi Singh
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जयपुर। राजस्थान की 16वीं विधानसभा का पांचवां सत्र (बजट सत्र) मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन की कार्यवाही की समीक्षा करते हुए बताया कि यह सत्र विधायी कार्यों और जवाबदेही के लिहाज से बेहद सफल रहा। 24 दिनों तक चले इस सत्र में पक्ष-विपक्ष की तीखी नोकझोंक के बीच प्रदेश के भविष्य से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए।

आंकड़ों में बजट सत्र: रिकॉर्ड तोड़ चर्चा और सवाल

सदन की कार्यवाही के दौरान पारदर्शिता का एक नया पैमाना देखने को मिला, जहाँ सरकार ने विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों के 97% जवाब उपलब्ध कराए।

  • कुल अवधि: 24 कार्यदिवस।
  • चर्चा का समय: कुल 184 घंटे।
  • कुल प्रश्न: 8,919 सवाल लगाए गए (4,311 तारांकित और 4,603 अतारांकित)।
  • अनुदान मांगें: 16 विभागों की मांगों पर 62 घंटे से अधिक की मैराथन बहस।
  • कटौती प्रस्ताव: विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए 3,935 प्रस्ताव पेश किए।

इन 10 विधेयकों ने बदली प्रदेश की नीति (प्रमुख बिल)

सत्र के दौरान कुल 10 विधेयक पारित किए गए, जिनमें सबसे क्रांतिकारी बदलाव ‘दो संतान’ नियम का खात्मा रहा।

  1. राजस्थान पंचायती राज एवं नगरपालिका संशोधन विधेयक: अब चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की अनिवार्य शर्त समाप्त।
  2. महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय बिल: जयपुर में खेल शिक्षा के लिए नए बुनियादी ढांचे की नींव।
  3. डिस्टर्ब्ड एरिया प्रॉपर्टी ट्रांसफर बिल: सांप्रदायिक संवेदनशील इलाकों में संपत्ति खरीद-फरोख्त पर कड़ा नियंत्रण।
  4. राजस्थान जन विश्वास संशोधन विधेयक: प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नियमों का सरलीकरण।
  5. शॉप्स एंड कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट बिल: व्यापारिक प्रतिष्ठानों के संचालन नियमों में आधुनिक बदलाव।

हंगामा, बहस और जवाबदेही

सत्र के दौरान कई बार माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। कुछ मौकों पर पक्ष और विपक्ष के बीच हाथापाई तक की नौबत आ गई, लेकिन इसके बावजूद विधायी कार्य नहीं रुके। विधानसभा अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि 16वीं विधानसभा के अब तक के सभी सत्रों को मिलाकर कुल 22,735 प्रश्नों में से 22,074 के उत्तर दिए जा चुके हैं, जो सरकार की सदन के प्रति जवाबदेही को दर्शाता है।

“यह सत्र राजस्थान के विकास की नई इबारत लिखने वाला रहा है। हमने न केवल बजट पारित किया, बल्कि उन पुराने नियमों को भी बदला जो वर्तमान समय में अप्रासंगिक हो चुके थे।”वासुदेव देवनानी, विधानसभा अध्यक्ष

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