-जूनियर्स के फर्जी सिग्नेचर और सवा 2 करोड़ का ‘खेल’
जालौर/जयपुर। डिजिटल इंडिया के इस दौर में भ्रष्टाचार का एक ऐसा ‘आभासी मॉडल’ सामने आया है, जहां विकास केवल फाइलों और वॉट्सऐप मैसेज तक सीमित है। जालौर के सायला से भ्रष्टाचार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। सायला बीसीएमओ डॉ. रघुनंदन बिश्नोई पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) के बजट में भारी हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हैं। एक साल (2025-26) के भीतर ही करीब 2.29 करोड़ का भुगतान ऐसे सामान और कार्यों के लिए कर दिया गया, जो धरातल पर कभी हुए ही नहीं।
कैसे हुआ 2.25 करोड़ का गबन?
BCMO ने अपनी मनमानी चलाने के लिए PHC प्रभारियों से उनके वित्तीय अधिकार और कैश बुक तक छीन लिए। जूनियर्स को डरा-धमकार या छुट्टी का फायदा उठाकर उनके हस्ताक्षर वॉट्सऐप पर मंगवाए गए और उन्हें फर्जी बिलों पर चिपका दिया गया। सिराणा PHC का जर्जर भवन सिर्फ कागजों पर शिफ्ट हुआ और उसके नाम पर लाखों की मरम्मत का बजट डकार लिया गया। फर्नीचर से लेकर कॉटन-बैंडेज तक, पेमेंट हो गया लेकिन अस्पतालों में एक सुई तक नहीं पहुंची।
भ्रष्टाचार के 4 बड़े ‘पिलर’, लूट की इनसाइड स्टोरी:-
- सांगाणा PHC: छुट्टी पर डॉक्टर, वॉट्सऐप पर मंगाए साइन:-
खेल: 28 मार्च 2026 को 97,570 का भुगतान जोधपुर की एक फर्म को 14 रैक के नाम पर कर दिया गया।
फर्जीवाड़ा: जिस वक्त बिल पास हुआ, प्रभारी डॉ. दीपक कुमार छुट्टी पर थे। BCMO ने वॉट्सऐप पर उनके हस्ताक्षर मंगवाए और बिल पर इस्तेमाल कर लिए।
सच्चाई: PHC में आज तक एक भी रैक नहीं पहुंची है।
- सिराणा PHC: कागजों पर रंग-रोहन, हकीकत में खंडहर:-
खेल: जर्जर भवन को कागजों पर ‘शिफ्ट’ दिखाया गया और मरम्मत व पेंटिंग के नाम पर करीब 1.5 लाख (99,950 और 50,000) निकाल लिए गए।
फर्जीवाड़ा: प्रभारी डॉ. अजय कुमार सैनी का आरोप है कि बीसीएमओ ने उनसे जबरन बिलों पर साइन करवाए।
सच्चाई: अस्पताल की हालत आज भी वैसी ही जर्जर है, मरम्मत के नाम पर फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं हुई।
- बालवाड़ा PHC: कुर्सियां-टेबल गायब, पेमेंट फुल:-
खेल: 28 फरवरी 2026 को मेड़ता सिटी की एक फर्म से 8 विजिटर कुर्सियां और 2 टेबल खरीदने का बिल पास हुआ।
फर्जीवाड़ा: प्रभारी डॉ. देवेंद्र कुमार का कहना है कि उन्हें सायला ऑफिस बुलाकर बिलों पर दस्तखत करवाए गए।
सच्चाई: भुगतान हुए महीनों बीत गए, लेकिन अस्पताल में न नई कुर्सी आई और न ही टेबल।
- 8 PHC का संयुक्त घोटाला: कॉटन और बैंडेज की ‘हवाई’ खरीद:-
खेल: 29 मार्च 2026 को एक साथ 15,75,105 (करीब 16 लाख) का भुगतान कॉटन और बैंडेज खरीदने के लिए किया गया।
फर्जीवाड़ा: यह खरीद जोधपुर की एक सहकारी समिति से दिखाई गई।
सच्चाई: PHC प्रभारियों ने कलेक्टर को लिखित में दिया है कि उन्हें आज तक न तो कॉटन मिली है और न ही बैंडेज। मरीजों के इलाज का सामान सिर्फ फाइलों में दर्ज है।
सिस्टम की उड़ाई धज्जियां:-
हैरानी की बात यह है कि 4 PHC ऐसे हैं जहाँ RMS (राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी) का खाता तक नहीं खुला है, ताकि सारा वित्तीय लेनदेन BCMO खुद कंट्रोल कर सकें। कलेक्टर और CMHO को शिकायत भेज दी गई है, लेकिन सवाल वही है—इतने बड़े स्तर पर लूट किसके संरक्षण में चल रही थी?
‘Expose Now’ का सवाल:-
“डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और मरीजों के हक का पैसा वॉट्सऐप के जरिए ‘हड़प’ लिया जाए, तो जनता किस पर भरोसा करे?”
