जयपुर: राजस्थान के सरकारी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का बुरा हाल है। प्रदेश की सबसे बड़ी राजस्थान यूनिवर्सिटी (आरयू) को करीब ढाई साल से राज्य सरकार से टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों को भरने की परमिशन नहीं मिली है, जिसके चलते यहां 1600 से अधिक पद खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश के 18 विश्वविद्यालयों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं और 11 सरकारी विश्वविद्यालयों में तो शिक्षक व कर्मचारियों के सभी पद खाली पड़े हैं।
छात्रों की पढ़ाई और गुणवत्ता पर असर
विश्वविद्यालयों में 30% से अधिक स्टाफ की कमी के कारण इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई, शैक्षणिक गुणवत्ता और यूनिवर्सिटी के नियमित कामकाज पर पड़ रहा है। उच्च शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले ढाई साल में प्रदेश के मात्र चार विश्वविद्यालयों में नियमित भर्ती निकाली गई, जिनमें से सिर्फ दो में ही शिक्षक और कर्मचारी लग पाए, जबकि बाकी 16 विश्वविद्यालयों में लंबे समय से कोई भर्ती नहीं हुई है।
विभिन्न विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की स्थिति:
- राजस्थान यूनिवर्सिटी (आरयू): यहां शिक्षकों के 1,016 पदों में से 608 और नॉन-टीचिंग के 1,692 पदों में से 1,034 पद खाली हैं।
- जोधपुर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी: इन दोनों सहित कुछ चुनिंदा जगहों को छोड़कर ज्यादातर यूनिवर्सिटीज में हालात बदतर हैं। लॉ यूनिवर्सिटी में 35 शैक्षणिक पदों पर और शेखावाटी यूनिवर्सिटी में 22 क्लर्कों की भर्ती हुई है।
- ब्रज विश्वविद्यालय, भरतपुर: यहाँ टीचिंग के सभी 30 और नॉन-टीचिंग के 55 में से 41 पद खाली हैं, यहाँ इस दौरान केवल संविदा भर्तियां की गईं।
- अन्य यूनिवर्सिटीज: कोटा यूनिवर्सिटी, जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी (जोधपुर), मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी (उदयपुर), महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी (अजमेर) और एमजीएसयू (बीकानेर) सहित अन्य सभी जगहों पर शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों का भारी संकट बना हुआ है। कई जगह टीचिंग या नॉन-टीचिंग के 100% पद तक खाली हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इन पदों पर नियमित भर्तियों के लिए हरी झंडी नहीं दी गई, तो प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है।