राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के आमजन और पर्यावरण को लेकर कई अहम फैसले किए गए, जिनमें सबसे प्रमुख ‘ट्री राजस्थान प्रोटेक्शन एक्ट’ (Tree Rajasthan Protection Act) को दी गई मंजूरी है।
इस नए और सख्त कानून के लागू होने के बाद अब प्रदेश में अपनी निजी जमीन पर भी मनमर्जी से पेड़ काटना संभव नहीं होगा।
खेजड़ी-रोहिड़ा समेत 29 पेड़ों पर पूर्ण प्रतिबंध
कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर संत समुदाय और पर्यावरण प्रेमियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह बिल लाया गया है। इस एक्ट के तहत राजस्थान के कल्प वृक्ष ‘खेजड़ी’ और राज्य वृक्ष ‘रोहिड़ा’ सहित कुल 29 प्रजाति के पेड़ों को काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
बिना अनुमति काटा तो 1 लाख का जुर्माना और जेल
नया कानून पेड़ों की कटाई को लेकर बेहद सख्त प्रावधान करता है:
- सजा का प्रावधान: यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति इन 29 प्रतिबंधित पेड़ों में से किसी को काटता हुआ दोषी पाया जाता है, तो उसे 1 साल की जेल हो सकती है और 1 लाख रुपये का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
- निजी भूमि पर भी लागू: यह कानून न केवल सरकारी, बल्कि व्यक्तिगत (निजी) भूमि पर भी सख्ती से लागू होगा (500 मीटर के दायरे को छोड़कर)।
काटना जरूरी हो तो क्या हैं शर्तें?
यदि किसी निर्माण कार्य या विशेष परिस्थिति में पेड़ काटना अति अनिवार्य हो जाए, तो उसके लिए कड़े नियम तय किए गए हैं:
यदि कोई व्यक्ति पेड़ लगाने में अपनी असमर्थता जताता है, तो उसे पेड़ों की कीमत के अनुसार एक निश्चित राशि सरकारी कोष में जमा करानी होगी। इस राशि का उपयोग कर सरकार स्वयं उन पेड़ों को लगवाएगी।
सबसे पहले सक्षम अधिकारी से इसकी पूर्व अनुमति लेनी होगी।
अनुमति मिलने पर, जितने पेड़ काटे जाएंगे, उसके बदले में 10% अधिक पेड़ लगाने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी लेनी होगी।
