राजस्थान में बिजली का बेहतर प्रबंधन: भीषण गर्मी और हीटवेव के बावजूद सरप्लस बिजली उपलब्ध

जयपुर। राजस्थान में इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव का प्रकोप जारी है, जिसके चलते बिजली की मांग अपने चरम पर पहुंच गई है। लेकिन, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार के बेहतर प्रबंधन और दूरगामी फैसलों के कारण इस बार प्रदेश में बिजली का कोई संकट नहीं है। राज्य के विद्युत प्रसारण एवं वितरण तंत्र में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों का ही नतीजा है कि भीषण गर्मी के दौर में भी घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्बाध व पर्याप्त बिजली की आपूर्ति की जा रही है।

जयपुर, जोधपुर और अजमेर विद्युत वितरण कंपनियों (Discoms) की सतत मॉनिटरिंग और नवाचारों के चलते उपभोक्ताओं की बिजली गुल (नो-करंट) होने की शिकायतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

किसानों को दिन में बिजली देने की तैयारी, 444 नए सब-स्टेशन तैयार

राज्य सरकार वर्ष 2027 तक किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए विद्युत प्रसारण तंत्र को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है।

  • वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक प्रदेशभर में 33 केवी के 444 नए सब-स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 211 पर काम चल रहा है।
  • इसी तरह 400, 220 और 132 केवी के 59 नए जीएसएस (GSS) बनाए गए हैं और 145 पर कार्य प्रगतिरत है।
  • प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्रों (कुसुम योजना और रूफटॉप) से 7,376 मेगावाट और कोयला आधारित तापीय परियोजनाओं से 7,830 मेगावाट विद्युत क्षमता उपलब्ध हो रही है।

गर्मी से निपटने के लिए पहले ही कर ली थी तैयारी

अत्यधिक तापमान के कारण होने वाली ट्रिपिंग या फॉल्ट से बचने के लिए डिस्कॉम्स ने गर्मी शुरू होने से पहले ही ‘अलर्ट मोड’ पर काम शुरू कर दिया था। इसके तहत:

  • ट्रांसफार्मरों में 13,473 एमवीए की क्षमता बढ़ाई गई।
  • 11 केवी और 33 केवी के 4,815 फीडरों का विभाजन किया गया।
  • 5 हजार सर्किट लाइनों का नेटवर्क विस्तार कर 3,682 जीएसएस के रखरखाव का काम पूरा किया गया।

शिकायतों में आई 41 हजार की भारी कमी

उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 1,129 ‘फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीमें’ (FRT) तैनात की गई हैं। इस रैपिड एक्शन का नतीजा यह रहा कि 1 अप्रैल 2026 से 20 मई 2026 तक नो-करंट (बिजली न होने) की केवल 3 लाख 11 हजार शिकायतें दर्ज हुईं। जबकि पिछले साल (2025) इसी अवधि में यह आंकड़ा 3 लाख 52 हजार था। यानी शिकायतों में सीधे तौर पर 41 हजार की कमी आई है, जो वितरण तंत्र के सुधार को दर्शाता है।

प्रदेश में मांग से ज्यादा (सरप्लस) बिजली उपलब्ध

भीषण हीटवेव के कारण 1 मई को जहां प्रदेश में बिजली की मांग 2860 लाख यूनिट थी, वह अब बढ़कर 3850 लाख यूनिट हो गई है। 27 मई की रात 10.15 बजे प्रदेश की अब तक की सबसे अधिक 17,333 मेगावाट विद्युत मांग दर्ज की गई, जिसे बिना किसी कटौती के पूरा किया गया।

दिन के समय स्थिति (मांग बनाम उपलब्धता):

  • 21 मई: मांग 15563 MW, उपलब्धता 18751 MW
  • 23 मई: मांग 16611 MW, उपलब्धता 20263 MW
  • 25 मई: मांग 15948 MW, उपलब्धता 21285 MW
  • 27 मई: मांग 16683 MW, उपलब्धता 21542 MW

हालांकि, रात के समय सोलर पावर न होने के कारण उपलब्धता 16,500 मेगावाट रह जाती है, लेकिन कमी होने पर सरकार इसे ‘एनर्जी एक्सचेंज’ से खरीद कर पूरा कर रही है।

जेवीवीएनएल का नवाचार: रात में गश्त कर रहे इंजीनियर

बिजली संकट रोकने के लिए जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) ने एक सराहनीय पहल की है। निगम के कनिष्ठ अभियंता (JEN), सहायक अभियंता (AEN) और अधिशासी अभियंता (XEN) रात 8 बजे से 11 बजे तक (पीक आवर्स में) फील्ड में जाकर हैवी लोड वाले ट्रांसफॉर्मरों और फीडरों की ‘विद्युत सुरक्षा’ (निगरानी) कर रहे हैं। इससे लोड बैलेंसिंग हो रही है और ट्रिपिंग व वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर सरकार अब पम्प स्टोरेज, गैस, जल विद्युत और ‘बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली’ पर भी जोर दे रही है, ताकि राजस्थान भविष्य में भी स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बना रहे।

Share This Article
Leave a Comment