-जोधपुर डिस्कॉम और उत्पादन निगम पर सबसे ज्यादा मार, 24 महीनों में 10% से अधिक उछला कर्जभार
-सरकारी दावों के उलट हर महीने औसतन 580 करोड़ से ज्यादा के दलदल में धंसती गईं प्रदेश की पांचों बिजली कंपनियां
जयपुर। प्रदेश की सरकारी बिजली कंपनियों की वित्तीय सेहत को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। वर्तमान सरकार के पिछले दो वर्षों (जनवरी 2024 से जनवरी 2026) के कार्यकाल के दौरान बिजली कंपनियों के कर्जभार में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महज 24 महीनों के भीतर प्रदेश की पांचों प्रमुख विद्युत कंपनियों पर कुल 13,938.32 करोड़ का नया कर्ज चढ़ चुका है। इसके साथ ही कंपनियों पर कुल कर्ज का आंकड़ा 1,39,424.94 करोड़ से छलांग लगाकर 1,53,363.26 करोड़ पर पहुंच गया है।
कंपनीवार कर्ज की स्थिति: कहां कितना बढ़ा वित्तीय बोझ (राशि करोड़ में)
| विद्युत निगम | जनवरी 2024 में कर्जभार | जनवरी 2026 में कर्जभार | 2 साल में हुआ इजाफा |
| जोधपुर डिस्कॉम | 32,843.42 | 37,940.30 | + 5,096.88 करोड़ |
| RRVUNL (उत्पादन निगम) | 37,838.26 | 42,554.24 | + 4,715.98 करोड़ |
| जयपुर डिस्कॉम | 32,910.50 | 34,811.54 | + 1,901.04 करोड़ |
| RRVPNL (प्रसार निगम) | 11,515.22 | 12,655.74 | + 1,140.52 करोड़ |
| अजमेर डिस्कॉम | 24,317.54 | 25,401.44 | + 1,083.90 करोड़ |
| कुल योग | 1,39,424.94 | 1,53,363.26 | + 13,938.32 करोड़ |
विद्युत निगम जनवरी 2024 में कर्जभार जनवरी 2026 में कर्जभार 2 साल में हुआ इजाफा
जोधपुर डिस्कॉम 32,843.42 37,940.30 + 5,096.88 करोड़
RRVUNL 37,838.26 42,554.24 + 4,715.98 करोड़
जयपुर डिस्कॉम 32,910.50 34,811.54 + 1,901.04 करोड़
RRVPNL 11,515.22 12,655.74 + 1,140.52 करोड़
अजमेर डिस्कॉम 24,317.54 25,401.44 + 1,083.90 करोड़
कुल योग 1,39,424.94 1,53,363.26 + 13,938.32 करोड़
जोधपुर डिस्कॉम की स्थिति सबसे चिंताजनक:-
तीनों वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) में जोधपुर डिस्कॉम की हालत सबसे ज्यादा बिगड़ी है, जहां दो सालों में सर्वाधिक 5,096.88 करोड़ का कर्ज बढ़ा है।
बिजली उत्पादन निगम पर 42554 करोड़ से अधिक का भार:-
बिजली बनाने वाली राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम का कुल कर्जभार जनवरी 2024 में 37,838.26 करोड़ था, जो बढ़कर अब 42,554.24 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है।
प्रतिदिन लगभग 19 करोड़ रुपये बढ़ा कर्ज:-
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पिछले दो वर्षों में औसतन हर रोज करीब 19.09 करोड़ और हर महीने 580.76 करोड़ का अतिरिक्त कर्जभार बिजली कंपनियों की बैलेंस शीट पर जुड़ता गया।
वित्तीय कुप्रबंधन की पोल खोलते आंकड़े:-
भारी-भरकम बिजली दरों और अधिभारों के बावजूद, पिछले 2 सालों (जनवरी 2024 से जनवरी 2026) में प्रदेश की बिजली कंपनियों पर 13,938.32 करोड़ का नया वित्तीय भार बढ़ गया है—जिसमें अकेले जोधपुर डिस्कॉम (5,096.88 करोड़) और उत्पादन निगम (4,715.98 करोड़) पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है—जिसने कुल कर्ज को 1.39 लाख करोड़ से बढ़ाकर 1.53 लाख करोड़ के पार पहुंचाकर ऊर्जा क्षेत्र के गंभीर वित्तीय संकट को उजागर कर दिया है।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now