जयपुर। राजस्थान में जलदाय विभाग (PHED) के ठेकेदारों और सरकार के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। पिछले 33 महीनों से अपने हक के पैसों के लिए भटक रहे ठेकेदारों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संघर्ष समिति के बैनर तले ठेकेदारों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 7 दिनों में उनके बकाया भुगतान का समाधान नहीं हुआ, तो पूरे प्रदेश की पेयजल आपूर्ति ठप कर दी जाएगी।
33 महीनों का इंतजार और ₹4500 करोड़ का बकाया:-
ठेकेदारों का आरोप है कि केंद्र सरकार का हवाला देकर राजस्थान में PHED ठेकेदारों का लगभग ₹3500 करोड़ और ₹1000 करोड़ GST का भुगतान रोक कर रखा गया है। ताज्जुब की बात यह है कि MNP कार्यों के बिल ट्रेजरी से पास होने के बावजूद ‘वेज मिन्स’ के जरिए भुगतान रोक दिया जाता है। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन हजारों मजदूरों और ठेकेदारों का खून-पसीना है जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर जनता तक पानी पहुँचाया।
घरों में चूल्हा जलना हुआ मुश्किल:-
संघर्ष समिति ने भावुक होते हुए कहा कि “यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की पुकार है जिनकी रोटी पिछले 33 महीनों से रुकी हुई है।” आज हालत यह है कि ठेकेदार अपने मजदूरों को मजदूरी नहीं दे पा रहे हैं। वेंडर्स का भुगतान रुकने से बाजार में साख खत्म हो रही है। जिन हाथों ने प्रदेश की प्यास बुझाई, आज उनके अपने घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है।
मजबूरी में लिया ‘कार्य बंद’ का फैसला:-
ठेकेदारों ने स्पष्ट किया है कि 13 तारीख से किया गया कार्य बंद और धरना कोई शौक या राजनीति नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई, तो संघर्ष समिति को यह कठोर कदम उठाना पड़ा। संघर्ष समिति ने राज्य सरकार और PHED प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि:-
“हमारी विनम्र लेकिन दृढ़ अपील है—7 दिनों के भीतर समाधान किया जाए। अन्यथा, हम पूरे राजस्थान में पानी की सप्लाई बाधित या बंद करने जैसा कठोर निर्णय लेने के लिए मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”
EXPOSE NOW की रिपोर्ट: अब देखना यह होगा कि क्या सरकार समय रहते जागती है या प्रदेश की जनता को इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ेगा। ठेकेदारों का साफ कहना है—”हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं, भीख नहीं!”
