पेपर लीक कांड: माफिया शेर सिंह मीणा 5 दिन के रिमांड पर, बाबूलाल कटारा के साथ आमने-सामने बिठाकर उगलवाए जाएंगे राज

जयपुर: राजस्थान में पेपर लीक मामलों की जांच कर रही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सोमवार को बड़ी कामयाबी हासिल की है। कोर्ट ने पेपर लीक माफिया अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को 5 दिन के पुलिस रिमांड पर एसओजी को सौंप दिया है। अब एसओजी इस माफिया को आरपीएससी (RPSC) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा और उसके भांजे विजय डामोर के सामने बिठाकर पूछताछ करेगी।

15 मई तक रिमांड पर शेर सिंह

एसओजी ने शेर सिंह मीणा को सोमवार दोपहर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 15 मई तक रिमांड पर लिया गया है। गौरतलब है कि आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा और उसका भांजा विजय डामोर पहले से ही 13 मई तक एसओजी की रिमांड पर हैं। अब इन तीनों आरोपियों को एक साथ बिठाकर पूछताछ की जाएगी ताकि इस पूरे सिंडिकेट की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

60 लाख में हुआ था सौदा

एसओजी की अब तक की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:

  • पेपर की खरीद-फरोख्त: आरोप है कि बाबूलाल कटारा ने स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2022 का पेपर शेर सिंह मीणा को 60 लाख रुपये में बेचा था।
  • भांजे के लिए डील: कटारा ने न केवल पैसे लिए, बल्कि अपने भांजे विजय डामोर के लिए सामान्य ज्ञान-भूगोल का पेपर भी हासिल किया।
  • सरकारी आवास पर ‘फर्जीवाड़ा’: कटारा प्रश्न-पत्र को अवैध रूप से अपने सरकारी आवास पर ले गया, जहाँ उसने अपने भांजे से उसे रजिस्टर में लिखवाया और फिर वही हाथ से लिखा पेपर शेर सिंह मीणा को थमा दिया।

कैसे फैला पेपर का जाल?

शेर सिंह मीणा ने पेपर मिलने के बाद उसकी प्रतियां तैयार कीं और उन्हें गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों— विनोद रेवाड़, भूपेन्द्र सारण और सुरेश ढाका को उपलब्ध करवाया। इन दलालों के जरिए परीक्षा से पहले कई कैंडिडेट्स तक पेपर पहुँचाया गया और बदले में करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई।

अब इन सवालों के जवाब तलाशेगी SOG

रिमांड अवधि के दौरान एसओजी मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी:

  1. पेपर और किस-किस स्तर तक पहुँचाया गया?
  2. इस प्रकरण में आरपीएससी के अन्य कौन से सदस्य या कर्मचारी शामिल थे?
  3. पेपर खरीदने वाले कैंडिडेट्स की पूरी सूची तैयार करना ताकि उन पर कार्रवाई हो सके।
  4. वसूली गई करोड़ों की रकम का निवेश कहाँ-कहाँ किया गया है?

एसओजी सूत्रों का मानना है कि तीनों आरोपियों के आमने-सामने आने से कई नए नाम और बड़े खुलासे होने की प्रबल संभावना है।

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