सड़क और परिवहन के क्षेत्र में राजस्थान ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य में देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक लंबाई के नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में अब तक 1,192 किलोमीटर लंबाई के एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा चुका है। यह देश के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे अधिक है।
राजस्थान में बना 1,192 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे नेटवर्क
राजस्थान में तेजी से विकसित हो रहा एक्सप्रेसवे नेटवर्क प्रदेश के सड़क बुनियादी ढांचे को नई दिशा दे रहा है। राज्य में निर्मित नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल प्रदेश के प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ रहे हैं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों के बीच आवागमन को भी आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इन परियोजनाओं के माध्यम से राजस्थान की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था को अधिक तेज और सुगम बनाने की दिशा में भी काम हुआ है।
देशभर में 10,389 किलोमीटर हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, देशभर में कुल 10,389 किलोमीटर लंबाई के हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी गई है।
इन स्वीकृत परियोजनाओं में से अब तक 4,809 किलोमीटर लंबाई का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। ऐसे में देश में अब तक निर्मित कुल नेशनल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में राजस्थान की हिस्सेदारी करीब एक चौथाई बताई जा रही है।
देश के कुल निर्मित नेशनल एक्सप्रेसवे में राजस्थान की बड़ी हिस्सेदारी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देशभर में अब तक निर्मित 4,809 किलोमीटर हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में से 1,192 किलोमीटर राजस्थान में निर्मित हुए हैं। इस लिहाज से वर्तमान में देश में निर्मित नेशनल एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है।
यह आंकड़ा राजस्थान के सड़क अवसंरचना विकास की तेजी को दर्शाता है। एक्सप्रेसवे के विस्तार से राज्य के दूरदराज क्षेत्रों को भी बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने और परिवहन व्यवस्था को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जताया केंद्रीय मंत्री का आभार
राजस्थान में सड़क अवसंरचना से जुड़ी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। राज्य सरकार की ओर से इसे प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
राजस्थान के आर्थिक विकास को मिल सकती है रफ्तार
एक्सप्रेसवे का विस्तार केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है। बेहतर हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। माल परिवहन में लगने वाला समय कम होने से उद्योगों और कारोबारियों को लाभ मिल सकता है।
राजस्थान भौगोलिक रूप से देश के बड़े हिस्से में फैला हुआ राज्य है और इसकी सीमाएं कई राज्यों से जुड़ी हैं। ऐसे में मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क राज्य को राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद कर सकता है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे सहित कई परियोजनाओं से मजबूत हुई कनेक्टिविटी
राजस्थान से होकर गुजरने वाले विभिन्न राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे राज्य की कनेक्टिविटी को मजबूत कर रहे हैं। इनमें दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिनसे राजस्थान के कई क्षेत्रों को देश के प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों से तेज सड़क संपर्क मिल रहा है।
एक्सप्रेसवे के कारण लंबी दूरी की यात्रा में समय की बचत होने के साथ सड़क परिवहन की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे राजस्थान के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
आगे भी सड़क बुनियादी ढांचे पर रहेगा फोकस
राजस्थान में एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर के निर्माण को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के विस्तार और नए कॉरिडोर के निर्माण से प्रदेश की कनेक्टिविटी और मजबूत होने की संभावना है।
राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से सड़क अवसंरचना को प्राथमिकता दिए जाने से राजस्थान में परिवहन, व्यापार और निवेश के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। फिलहाल 1,192 किलोमीटर निर्मित एक्सप्रेसवे के साथ राजस्थान देश में सबसे अधिक लंबाई वाले नेशनल एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य बनकर सामने आया है।
