राजस्थान में अवैध खनन की समस्या एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने चंबल नदी क्षेत्र में हो रहे अवैध रेत खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को अंतिम चेतावनी दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकारें अवैध खनन रोकने में विफल रहती हैं, तो वहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) या अर्धसैनिक बलों को तैनात करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
चंबल अभयारण्य पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने चंबल घड़ियाल अभयारण्य में हो रहे “पर्यावरणीय विनाश” पर चिंता व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं:
- CCTV निगरानी: खनन के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर हाई-रिज़ॉल्यूशन वाले वाई-फाई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
- GPS ट्रैकिंग: पायलट प्रोजेक्ट के तहत धौलपुर (राजस्थान) और मुरैना (MP) में सभी खनन मशीनों, डंपरों और ट्रैक्टरों में जीपीएस (GPS) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
- अधिकारियों की जिम्मेदारी: कोर्ट ने कहा है कि लापरवाही पाए जाने पर जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
- हथियारबंद पेट्रोलिंग: माफियाओं के अत्याधुनिक हथियारों का मुकाबला करने के लिए आधुनिक संचार उपकरणों और हथियारों से लैस गश्ती दल तैनात किए जाएंगे।
प्रदेशव्यापी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के आँकड़े
राज्य सरकार द्वारा अवैध खनन के विरुद्ध चलाए जा रहे महा-अभियान के तहत अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार:
- दर्ज मामले: बीते एक साल के भीतर राज्य में अवैध खनन और परिवहन के कुल 10,542 मामले दर्ज किए गए हैं।
- जब्ती और गिरफ्तारी: अब तक 10,378 वाहन और मशीनें सीज की जा चुकी हैं और 733 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
- राजस्व वसूली: माफियाओं से 107 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला जा चुका है और करीब 2 करोड़ टन खनिज जब्त किया गया है।
स्थानीय भ्रष्टाचार और भारी जुर्माना
इस अभियान के बीच कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं:
- पुलिस पर आरोप: बारां जिले में आरोप लगे हैं कि अवैध खनन में शामिल लगभग 70 प्रतिशत ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पुलिस कर्मियों या उनके रिश्तेदारों की हैं।
- 38 करोड़ का जुर्माना: ब्यावर (अजमेर) जिले के अमरगढ़ चांग क्षेत्र में लीज क्षेत्र से बाहर अवैध खनन करने पर एक फर्म पर 38 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक जुर्माना लगाया गया है।
- भीलवाड़ा घोटाला: भीलवाड़ा में 31.26 करोड़ रुपये के अवैध गारनेट खनन के मामले का खुलासा होने के बाद चार विशेष जांच टीमों का गठन किया गया है।
