राजस्थान हाईकोर्ट की सुरक्षा में बड़ी सेंध: सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ कर SOG के 5 मुकदमों की फाइलें गायब, FIR दर्ज

राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ (Jodhpur Bench) की सुरक्षा और डिजिटल व्यवस्था में एक गंभीर चूक का मामला सामने आया है। यहाँ के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और सॉफ्टवेयर के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ कर राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) से जुड़े 5 महत्वपूर्ण मुकदमों की फाइलों को सिस्टम से हटा दिया गया। इस साइबर सेंधमारी और तकनीकी हेरफेर के कारण इन मामलों की सुनवाई तय समय पर नहीं हो सकी।

सुनवाई से ठीक 5 दिन पहले की गई छेड़छाड़

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 31 जुलाई को उस समय अंजाम दी गई जब सुनवाई में महज 5 दिन का वक्त बचा था। कॉज लिस्ट सेक्शन (Cause List Section) के एक न्यायिक सहायक की लॉगिन आईडी का उपयोग करके 31 जुलाई की शाम 5:36 बजे कोर्ट नंबर 25 की कॉज लिस्ट में पाँच याचिकाओं को क्रयमानुसार (क्रम संख्या 196 से 200 तक) जोड़ा गया था।

इसके बाद, इसकी एक प्रिंटेड कॉपी तैयार कर संबंधित अदालत को भेजी गई। लेकिन महज 48 मिनट बाद, शाम 6:24 बजे किसी अन्य कर्मचारी की यूजर आईडी का दुरुपयोग करते हुए उन सभी पाँचों मामलों को अदालत के कंप्यूटर सिस्टम से पूरी तरह हटा दिया गया।

वकीलों के पूछने पर हुआ मामले का खुलासा

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब 4 अगस्त को संबंधित मामलों के वकील आगामी 5 अगस्त को होने वाली सुनवाई की जानकारी के लिए कॉज लिस्ट देखने पहुँचे। सूचियों में केस न मिलने पर वकीलों ने जब इस पर आपत्ति जताई और पूछताछ की, तो प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।

कॉज लिस्ट सेक्शन के कर्मचारियों ने संबंधित कोर्ट रूम में भौतिक फाइलों (Physical Files) की तलाश की, लेकिन वे फाइलें भी वहाँ से गायब मिलीं। ये सभी फाइलें एसओजी पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकियों को रद्द करने और मामलों को क्लब करने से जुड़ी विविध आपराधिक याचिकाओं (Miscellaneous Criminal Petitions) से संबंधित थीं। खास बात यह है कि इन मामलों में याचिकाकर्ताओं को पहले ही अदालत से गिरफ्तारी पर अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) मिला हुआ था।

अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज, जांच शुरू

घटना की पुष्टि होने के बाद, राजस्थान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) देवेंद्र सिंह भाटी की आधिकारिक शिकायत पर 12 अगस्त को कुड़ी भगतासनी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy), चोरी और साइबर अपराध (Cybercrime) से संबंधित प्रासंगिक धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।

थाना प्रभारी और जाँच अधिकारियों का कहना है कि वे सिस्टम के डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेल्स (System Logs and Activity Trails) की बारीकी से जाँच कर रहे हैं। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सिस्टम तक पहुँचने के लिए किन कर्मचारियों की क्रेडेंशियल्स का उपयोग किया गया और क्या इस साइबर छेड़छाड़ में अदालत के भीतर के किसी कर्मचारी की संलिप्तता थी या नहीं। पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की तह तक जाने के लिए हर तकनीकी पहलू को खंगाल रही है।


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