राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 53,750 पदों वाली चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती का प्री-DV रिजल्ट रद्द

-बिना किसी क्राइटेरिया और अंकों की अनिवार्यता के जारी कर दिया था परिणाम, कोर्ट ने व्यवस्था को ठहराया गलत

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की एक बड़ी भर्ती प्रक्रिया में हुई गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने 53 हजार 750 पदों पर आयोजित हुई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती के परिणाम को सिरे से खारिज करते हुए रद्द कर दिया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकल पीठ ने यह अहम आदेश याचिकाकर्ता विनोद कुमार व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।

न्यायालय ने इस साल 16 जनवरी 2026 को जारी किए गए ‘प्री-डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन’ (Pre-DV) रिजल्ट को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “बिना मापदंड के कैसे जारी हुआ रिजल्ट?”

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने चयन बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि—

“यह परिणाम बिना किसी ठोस क्राइटेरिया (मापदंड) के जारी कर दिया गया। रिजल्ट तैयार करते समय अंकों की अनिवार्यता (न्यूनतम योग्यता) का भी कोई ध्यान नहीं रखा गया, जो कि नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।”

इन आरक्षित वर्गों के परिणाम हुए प्रभावित
हाईकोर्ट के इस आदेश से कई आरक्षित श्रेणियों के प्री-रिजल्ट सीधे तौर पर रद्द हो गए हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

-एक्स-सर्विसमैन (भूतपूर्व सैनिक)

-विधवा वर्ग

-दिव्यांग कोटा

-सहरिया व अन्य विशेष वर्ग

अधिवक्ता हरेंद्र नील ने उजागर की खामियां:-

अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए प्रसिद्ध अधिवक्ता हरेंद्र नील ने पुरजोर तरीके से पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बोर्ड ने परिणाम जारी करने में तय नियमों और न्यूनतम पात्रता अंकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया था, जिससे योग्य अभ्यर्थी रेस से बाहर हो रहे थे। दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने भर्ती के इस विवादित परिणाम को पूरी तरह खारिज कर नए सिरे से नियम सम्मत कार्रवाई करने का आधार तैयार कर दिया है।

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