-CM बजट घोषणा की योजना में अधिकारियों की बड़ी लापरवाही आई सामने, RTPP नियमों की उड़ाई धज्जियां
-बिड इवैल्युएशन कमेटी (BEC) ने पकड़ी गंभीर अनियमितताएं, नए सिरे से जारी होंगे टेंडर
-लापरवाह एसीई रामचन्द्र राड(अतिरिक्त चार्ज) को कारण बताओ नोटिस के निर्देश
-‘Expose Now’ ने उजागर किया था टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी का खेल
जयपुर। इसे कहते हैं खोजी पत्रकारिता का दमदार असर! टोंक जिले की करोड़ों रुपये की पेयजल योजना में चहेतों को फायदा पहुंचाने और नियमों की धज्जियां उड़ाने के जिस ‘इनडोर खेल’ को ‘Expose Now’ ने प्रमुखता से उजागर किया था, आखिरकार उस पर सरकार और उच्च स्तरीय कमेटी को मुहर लगानी ही पड़ी। ‘Expose Now’ के खुलासे के बाद हरकत में आई एम्पॉवर्ड प्रोक्योरमेंट कमेटी (EPC) ने कड़ा फैसला लेते हुए बीसलपुर बांध के डूब क्षेत्र के 20 गांवों की पाइप जलापूर्ति योजना के लिए जारी 1714.68 लाख रुपये (17.14 करोड़ रुपये) की पूरी टेंडर प्रक्रिया को ही निरस्त (Annul) कर दिया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार की ‘सीएम बजट घोषणा 2025-26’ के तहत होने वाले इस बेहद महत्वपूर्ण काम में ग्राउंड लेवल के अधिकारियों ने जमकर मनमानी की थी। ‘Expose Now’ ने अपनी पिछली रिपोर्ट में साफ-साफ चेताया था कि कैसे टेंडर जारी होने के बाद बैकडोर से शुद्धिपत्र (Corrigendum) निकालकर आरटीपीपी (RTPP) नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। अब उसी गड़बड़ी को सच मानते हुए उच्च स्तरीय कमेटी ने न सिर्फ टेंडर रद्द किया है, बल्कि इस गंभीर लापरवाही के कारण योजना में बेवजह की देरी और प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने की आशंका को देखते हुए दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
‘Expose Now’ ने क्या किया था खुलासा, जिस पर EPC को लेना पड़ा एक्शन?
विभाग के भीतर चल रहे जिस खेल को ‘Expose Now’ ने बेनकाब किया था, उसकी पूरी कहानी अब आधिकारिक दस्तावेजों में भी प्रमाणित हो गई है:
-टेंडर के बाद बदली गई शर्तें: एनआईटी नंबर 18/2025-26 के तहत तकनीकी बोलियां खुलने से ठीक पहले अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE), पीएचईडी अजमेर रीजन ने नियमों के खिलाफ जाकर शुद्धिपत्र जारी कर दिया। इसके जरिए बीओक्यू (Bill of Quantities) में बड़ा फेरबदल किया गया, ताकि पूरी बिडिंग प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। ‘Expose Now’ ने इस वित्तीय अस्पष्टता को प्रमुखता से उठाया था।
-EPC की बैठक में लगी मुहर: हमारी खबर के बाद जब मामला एम्पॉवर्ड प्रोक्योरमेंट कमेटी (EPC) की 7वीं बैठक में पहुंचा, तो वहां भी माना गया कि टेंडर आमंत्रित होने के बाद बीओक्यू में बदलाव करना आरटीपीपी अधिनियम 2012 और नियम 2013 का खुला उल्लंघन है। इसके बाद फाइनेंस कमेटी (FC) ने RTPP नियम 72 के तहत इसे रद्द करने का अंतिम निर्णय लिया।

क्या है पूरा मामला? कैसे हुआ ‘नियमों का उल्लंघन’:-
टोंक जिले में इस पेयजल कार्य के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED), जयपुर के मुख्य अभियंता (ग्रामीण) द्वारा एनआईटी नंबर 18/2025-26 (NIT No. 18/2025-26) जारी किया गया था। इस टेंडर के तहत तकनीकी बोलियां (Technical Bids) 1 जनवरी 2026 को खोली गई थीं, जिसमें 5 बड़ी कंपनियों (मैसर्स गुलाब चंद कुमावत, मैसर्स कुमावत एंड कंपनी, मैसर्स ओम प्रोजेक्ट्स, मैसर्स राइट वाटर सॉल्यूशंस और मैसर्स आरएससी इन्फ्राटेक) ने भाग लिया था।
जहाँ फंसा पेच: ‘चोर दरवाजे’ से किया गया बदलाव:-
बिड इवैल्युएशन कमेटी (BEC) की जांच में सामने आया कि टेंडर आमंत्रित होने के बाद अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE), पीएचईडी अजमेर रीजन द्वारा 16 दिसंबर 2025 को एक शुद्धिपत्र (Corrigendum No. 1) जारी किया गया था। इस शुद्धिपत्र के जरिए बीओक्यू (Bill of Quantities – वस्तुओं की सूची और नामकरण) में बैकडोर से बड़े और बुनियादी बदलाव कर दिए गए। आरटीपीपी अधिनियम 2012 और आरटीपीपी नियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार, टेंडर जारी होने के बाद बीओक्यू में इस तरह का बड़ा फेरबदल करना पूरी तरह गैर-कानूनी है। कमेटी का मानना था कि इस फेरबदल से वित्तीय अस्पष्टता पैदा हुई और चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने या प्रक्रिया को प्रभावित करने की गुंजाइश बनी।
एम्पॉवर्ड कमेटी का बड़ा फैसला: टेंडर रद्द, नए सिरे से होगी बिडिंग:-
इस मामले को लेकर 13 मार्च 2026 को एम्पॉवर्ड प्रोक्योरमेंट कमेटी (EPC) की 7वीं बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। इसके बाद, फाइनेंस कमेटी (FC) ने RTPP नियम 2013 के नियम 72 के तहत इस पूरी बिडिंग प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Annul) करने के फैसले पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

‘Expose Now’ के बड़े खुलासे, कमेटी के कड़े निर्देश:-
उच्च स्तरीय कमेटी ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और विभाग को निम्नलिखित सख्त निर्देश जारी किए हैं:
-लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज: कमेटी ने साफ कहा कि अधिकारियों की इस घोर लापरवाही के कारण ‘मुख्यमंत्री बजट घोषणा’ के कार्यों में अनावश्यक देरी हुई है और प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने (Cost Escalation) का खतरा पैदा हुआ है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर तुरंत ‘कारण बताओ नोटिस’ थमाया जाए।
-काम की डुप्लीकेसी पर रोक: संबंधित अतिरिक्त मुख्य अभियंता को सख्त हिदायत दी गई है कि वह यह सुनिश्चित करें कि यह काम किसी अन्य योजना (जैसे जल जीवन मिशन – JJM, अमृत 2.0 या स्टेट फंड) के तहत न चल रहा हो। इसके लिए उन्हें ‘डुप्लीकेसी न होने’ का आधिकारिक सर्टिफिकेट भी देना होगा। टोंक के इन 20 गांवों की पेयजल किल्लत को देखते हुए इस कार्य के लिए जल्द से जल्द बिल्कुल नए सिरे से (Fresh Bids) टेंडर आमंत्रित करने को कहा गया है।
कौन है रामचंद्र राड? जिसके रसूख के आगे बौने साबित होते हैं आला अफसर!
रामचंद्र राड कोई साधारण अधिकारी नहीं हैं। एक समय वो पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के बेहद रसूखदार ओएसडी (OSD) के रूप में काम करते थे। लेकिन सचिवालय और विभाग में तबादलों और टेंडरों में ‘मोटी वसूली’ के गंभीर आरोप लगने के बाद जब विवाद बढ़ा, तो मंत्री ने अपने इस चहेते अधिकारी को बचाने के लिए एक अनोखा रास्ता निकाला। विवादों से बचने के लिए रामचंद्र राड को जयपुर से हटाकर अजमेर में एसई (SE) के पद पर भेजा गया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इसे सजा देने के बजाय ‘पुरस्कार’ में बदल दिया गया। उन्हें एसीई (ACE) अजमेर का अतिरिक्त चार्ज भी सौंप दिया गया। पिछले करीब डेढ़ साल से राड अजमेर में इन दो-दो मलाईदार पदों का चार्ज संभाल रहे हैं और पूरे संभाग के टेंडरों को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं। मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का सीधा वरदहस्त होने के कारण विभाग के बड़े अधिकारी भी रामचंद्र राड के ‘खेल’ के खिलाफ मुंह खोलने से कतराते थे। लेकिन ‘Expose Now’ ने जब से इस भ्रष्ट तंत्र और रामचंद्र राड के फर्जीवाड़ों की पोल खोलना शुरू किया, तब जाकर विभाग के सोए हुए आलाधिकारियों की नींद टूटी। खुद को कानूनी पचड़े और जेल जाने से बचाने के लिए अब आला अफसरों ने गलत कार्यों में सहयोग करना बंद कर दिया है।

करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट में टेंडर जारी होने के बाद ऐन वक्त पर बीओक्यू (BOQ) बदलना यह दर्शाता है कि ग्राउंड लेवल पर बैठे अधिकारी चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए ‘इनडोर गेम’ खेल रहे थे। गनीमत रही कि उच्च स्तरीय कमेटी ने समय रहते इस गड़बड़ी को पकड़ लिया, वरना 17.14 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट विवादों की भेंट चढ़ जाता। अब देखना यह है कि शो-कॉज नोटिस के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या ठोस दंडात्मक कार्रवाई होती है!
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
