राजस्थान निकाय चुनाव में देरी के बीच बड़ा प्रशासनिक सुधार; अब अधिकारियों और महापौरों के पास होंगे ज्यादा अधिकार

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने निकायों के आयुक्तों, अधिकारियों, महापौरों, सभापतियों और वित्तीय समितियों के जनप्रतिनिधियों की वित्तीय शक्तियों में करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कदम का उद्देश्य विकास कार्यों में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना और योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक पहुंचाना है।

15 दिनों में आएगी कमेटी की रिपोर्ट

इस महत्वपूर्ण बदलाव के लिए स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक जुईकर प्रतीक चन्द्रशेखर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी 15 दिनों के भीतर अपनी अनुशंसा रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान नगर पालिका अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

कमेटी के सदस्य:

  • निदेशक, स्वायत्त शासन विभाग (अध्यक्ष)
  • अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम जयपुर
  • निदेशक, विधि निदेशालय
  • वित्तीय सलाहकार, निदेशालय (सदस्य सचिव)

बजट का गणित और वर्तमान स्थिति

राजस्थान में वर्तमान में 309 नगरीय निकाय कार्यरत हैं, जिनका सालाना बजट लगभग 5000 से 6000 करोड़ रुपए है। इसमें से करीब 2500 करोड़ रुपए विकास कार्यों पर खर्च होते हैं, जबकि शेष राशि वेतन और भत्तों में जाती है। वर्तमान में चुनाव न होने के कारण इन राशियों को खर्च करने का अधिकार मुख्य रूप से प्रशासनिक अधिकारियों के पास है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकारी और प्रशासक बढ़ी हुई राशि का उपयोग कर सकेंगे।

प्रस्तावित बजट बढ़ोतरी: एक नजर में

सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलावों के बाद वित्तीय शक्तियों का नया ढांचा कुछ इस प्रकार हो सकता है:

1. नगर निगम (Nagar Nigam)

पद/इकाईवर्तमान वित्तीय शक्तिसंभावित वित्तीय शक्ति
अतिरिक्त आयुक्त/उपायुक्त25 लाख तक40 लाख तक
आयुक्त1 करोड़ तक1.60 करोड़ तक
महापौर2 करोड़ तक3 करोड़ तक
वित्त समिति5 करोड़ तक7 से 9 करोड़ तक
निगम बोर्डपूर्ण बजटपूर्ण बजट

2. नगर परिषद (Nagar Parishad)

पद/इकाईवर्तमान वित्तीय शक्तिसंभावित वित्तीय शक्ति
आयुक्त2 लाख तक3 लाख तक
सभापति50 लाख तक75 से 80 लाख तक
वित्त समिति1 करोड़ तक1.50 करोड़ तक

3. नगर पालिका (Nagar Palika)

पद/इकाईवर्तमान वित्तीय शक्तिसंभावित वित्तीय शक्ति
अधिशाषी अधिकारी (EO)1 लाख तक1.50 लाख तक
चेयरमैन25 लाख तक40 लाख तक
वित्त समिति50 लाख तक1 करोड़ तक

आम जनता को क्या होगा लाभ?

वर्तमान में जनप्रतिनिधियों के अभाव में आम जनता को छोटे-मोटे कार्यों के लिए भी निकायों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सरकार का मानना है कि वित्तीय शक्तियों में वृद्धि और निकायों में एकरूपता आने से फाइलों का निस्तारण जल्दी होगा। इससे सड़कों की मरम्मत, सफाई व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन समय सीमा के भीतर हो सकेगा।

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