कोटा। राजस्थान के खेल इतिहास में एक अभूतपूर्व और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी की विधिक और असाधारण वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी सुंडा ने वह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जो आज से पहले प्रदेश का कोई भी महिला या पुरुष खिलाड़ी नहीं कर सका था। दिव्यांशी का चयन एशियन गेम्स 2026 के लिए घोषित आधिकारिक भारतीय वुशु टीम में विधिक रूप से किया गया है। वह राजस्थान के खेल इतिहास में एशियाई खेलों के लिए चुनी जाने वाली सबसे पहली वुशु एथलीट बन गई हैं।
इस महा-उपलब्धि के साथ ही दिव्यांशी इसी महीने 23 से 30 जून तक चीन के हुबेई प्रांत में आयोजित होने वाली ‘एससीओ (SCO) वुशु चैंपियनशिप’ में भी भारतीय खेल संवर्ग का आधिकारिक प्रतिनिधित्व कर रही हैं। राजस्थान वुशु संघ के विधिक पदाधिकारियों के अनुसार, एशियन गेम्स के कड़े मुकाबलों से पहले भारतीय टीम के चयनित एथलीटों का उच्च स्तरीय तकनीकी और विधिक प्रशिक्षण शिविर 1 जुलाई से 31 जुलाई तक चीन में ही आयोजित किया जाएगा, ताकि खिलाड़ी वहां की खेल परिस्थितियों के अनुसार खुद को सांख्यिकीय रूप से ढाल सकें।
विधिक ओपन ट्रायल और अर्जुन अवॉर्डी को दी पटखनी: चयन की क्रोनोलॉजी
एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम का हिस्सा बनना दिव्यांशी के लिए किसी विधिक अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। वुशु फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित ओपन ट्रायल के जरिए देश के शीर्ष आठ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इसके बाद पिछले एक वर्ष की समयावधि में हर दो महीने के अंतराल पर कुल 5 कठिन विधिक ट्रायल्स आयोजित किए गए।
इस चयन प्रक्रिया का अंतिम और निर्णायक ट्रायल 5 से 8 जून तक श्रीनगर के इनडोर स्टेडियम में संपन्न हुआ। यहां 60 किलोग्राम भार वर्ग के विधिक द्वंद्व में दिव्यांशी ने अपने सांख्यिकीय कौशल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया:
- प्रथम मुकाबला: दिव्यांशी ने पहले राउंड में मणिपुर की तकनीकी रूप से मजबूत खिलाड़ी भूमिका देवी को आसानी से शिकस्त दी।
- द्वितीय मुकाबला (महा-उलटफेर): फाइनल और निर्णायक विधिक मुकाबले में दिव्यांशी ने देश की सबसे दिग्गज खिलाड़ी, अर्जुन अवार्ड से सम्मानित और वर्तमान में डीवाईएसपी (DYSP) पद पर कार्यरत अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता रोशीबीना देवी को तकनीकी अंकों के आधार पर मात देकर खेल जगत को चौंका दिया।
दिव्यांशी का सांख्यिकीय खेल ग्राफ और स्वर्ण पदकों का सफर
दिव्यांशी का राष्ट्रीय खेल मंचों पर प्रदर्शन हमेशा से ही शत-प्रतिशत सांख्यिकीय सफलता दर वाला रहा है। राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 12 स्वर्ण पदक (Gold Medals) अपने नाम किए हैं, जिनका विधिक वर्गीकरण इस प्रकार है:
| राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का स्तर | जीते गए कुल विधिक स्वर्ण पदक (Gold Medals) |
| सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप | 4 बार स्वर्ण पदक |
| जूनियर नेशनल वुशु कप | 3 बार स्वर्ण पदक |
| राष्ट्रीय स्कूल गेम्स (School Games) | 2 बार स्वर्ण पदक |
| खेलो इंडिया नेशनल गेम्स (Khelo India) | 2 बार स्वर्ण पदक |
| फेडरेशन कप (Federation Cup) | 1 बार स्वर्ण पदक |
| सीनियर वर्ग नेशनल ओपन | 1 बार स्वर्ण पदक (पिछले वर्ष की उपलब्धि) |
इसके अतिरिक्त, दिव्यांशी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विधिक छाप छोड़ चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 2024 की जूनियर विश्व वुशु चैंपियनशिप में देश के लिए कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतकर वैश्विक खेल पटल पर अपनी प्रतिभा का विधिक लोहा मनवाया था।
14 किलो वजन घटाने का विधिक संकल्प और पारिवारिक बैकग्राउंड
दिव्यांशी के मुख्य कोच और कोटा वुशु संघ के सचिव अशोक गौतम ने ‘Expose Now’ के खेल बुलेटिन के लिए विशेष बातचीत में बताया कि शुरुआती ट्रायल्स के समय दिव्यांशी का शारीरिक वजन 74 किलोग्राम था, जबकि एशियन गेम्स के विधिक नियमों के अनुसार केवल 52 और 60 किलोग्राम भार वर्ग ही प्रतियोगिता में शामिल थे। यही कारण था कि वह पहली ट्रायल में अपना सर्वश्रेष्ठ सांख्यिकीय प्रदर्शन नहीं कर सकी थीं। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय कड़ी मेहनत, अनुशासित विधिक डाइट और कठोर कार्डियो ट्रेनिंग के बल पर महज कुछ महीनों में करीब 14 किलो वजन कम किया और खुद को 60 किलोग्राम भार वर्ग में मजबूती से विधिक रूप से स्थापित कर दिया।
दिव्यांशी वर्ष 2017 से लगातार कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रतिदिन 6 से 8 घंटे कड़ा विधिक अभ्यास कर रही हैं। उनका पारिवारिक बैकग्राउंड भी देश सेवा और विधिक अनुशासन से जुड़ा है। उनकी मां शशि प्रभा राजस्थान पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर वर्तमान में कोटा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में कार्यरत हैं, जबकि उनके पिता सुनील कुमार सुंडा भारतीय सेना से विधिक रूप से सेवानिवृत्त (Retired) हैं।

खेल संघों का आभार और जापान एशियन गेम्स 2026 का विधिक लक्ष्य
कोटा वुशु संघ के अध्यक्ष शिव भगवान गोदारा और खेल विशेषज्ञों के मुताबिक, कोच अशोक गौतम ने बरसों पहले ही दिव्यांशी की अद्वितीय खेल विधा को पहचान लिया था और भविष्यवाणी की थी कि वह एक दिन एशियाई खेलों में तिरंगा लहराएगी। इस सफलता में राजस्थान वुशु संघ के अध्यक्ष हीरानंद कटारिया के प्रशासनिक प्रयासों और वुशु फेडरेशन ऑफ इंडिया के सीईओ सोहेल अहमद के विधिक सहयोग की भी बड़ी भूमिका रही, जिन्होंने दिव्यांशी को तीसरी चयन ट्रायल में वाइल्ड कार्ड के जरिए विधिक अवसर प्रदान किया।
भारतीय टीम के मुख्य कोच और अंतरराष्ट्रीय विधिक निर्णायक राजेश कुमार टेलर ने दिव्यांशी को इस मील के पत्थर पर विधिक बधाई संदेश भेजते हुए कहा कि अब समय अपनी खेल तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार और अधिक धारदार बनाने का है। गौरतलब है कि खेल कैलेंडर के अनुसार एशियन गेम्स 2026 का भव्य आयोजन 22 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के नागोया शहर में होना प्रस्तावित है, जहां दिव्यांशी से देश को स्वर्ण पदक की प्रबल विधिक उम्मीदें हैं।