राजस्थान बना नॉर्थ इंडिया में एमडी ड्रग्स क नया एपीसेंटर, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्रवाई में 800 किलो से अधिक एमडी जब्त, जानिए कैसे लीगल केमिकल्स के जरिए फैक्ट्रियों में तैयार हो रहा है मौत का यह सामान।

जयपुर। राजस्थान में नशे के कारोबार की तस्वीर तेजी से बदल रही है। कभी हेरोइन, चरस, गांजा और कोकीन जैसे नशीले पदार्थों का नाम सबसे ज्यादा सामने आता था, लेकिन अब एमडी यानी मेफेड्रोन ने नशे के बाजार में अपनी अलग जगह बना ली है। राजस्थान में बीते कुछ सालों में एमडी (मेफेड्रोन/Mephedrone) ड्रग्स का प्रसार बेहद तेजी से हुआ है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाइयों से यह साफ हो गया है कि राजस्थान अब केवल एमडी ड्रग्स का कंजम्पशन सेंटर ही नहीं, बल्कि इसका मैन्युफैक्चरिंग हब भी बनता जा रहा है।
राज्य के विभिन्न जिलों—विशेषकर जोधपुर, बाड़मेर, पाली, सिरोही, भीलवाड़ा, और जयपुर के बाहरी इलाकों में पुलिस ने अवैध एमडी ड्रग्स बनाने वाली फैक्ट्रियों और लैब्स का भंडाफोड़ किया है। सुनसान इलाकों, कृषि फार्मों और बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों में चल रही इन 48 से अधिक अवैध फैक्ट्रियों पर पुलिस का शिकंजा कसा है। अकेले राजस्थान में हुई जब्तियां पूरे उत्तर भारत में हुई कुल कार्रवाइयों का लगभग 70% हिस्सा हैं, जिससे इस नेटवर्क के फैलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विकास कुमार (आईजी, ANTF):
“हमारी टीमों का मुख्य फोकस सप्लाई चेन की रीढ़ तोड़ना है। हम केवल ड्रग्स बेचने वाले पैडलर्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन अवैध लैब्स तक पहुंच रहे हैं जहां यह तैयार हो रहा है। राज्य में अब तक 48 से अधिक ऐसी अवैध मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को ध्वस्त किया गया है और 800 किलो से ज्यादा एमडी जब्त की गई है। ड्रग्स के खिलाफ हमारी यह जीरो टॉलरेंस की नीति आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगी।”

अब तक की पुलिस कार्रवाइयां और जब्ती के आंकड़े
एमडी ड्रग्स के खिलाफ राजस्थान पुलिस और ANTF ने अब तक की सबसे बड़ी मुहीम छेड़ी है:
कुल जब्त एमडी ड्रग्स: 800 किलोग्राम से अधिक।
ध्वस्त की गई अवैध फैक्ट्रियां/लैब्स: 48 से ज्यादा।
उत्तर भारत में हिस्सेदारी: पूरे उत्तर भारत में हुई कुल कार्रवाई और जब्ती का 70% अकेले राजस्थान से दर्ज


किया गया है।
गिरफ्तारियां: राज्यभर में सैकड़ों ड्रग तस्कर, लोकल सप्लायर और केमिकल एक्सपर्ट्स गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
कैसे बनाया जाता है एमडी ड्रग्स?
एमडी ड्रग्स यानी मेफेड्रोन एक ‘सिंथेटिक ड्रग’ है। इसे प्राकृतिक पौधों (जैसे अफीम या गांजा) से नहीं, बल्कि पूरी तरह प्रयोगशाला में रसायनों (Chemicals) के मिश्रण से तैयार किया जाता है।
गैर-प्रतिबंधित केमिकल्स का इस्तेमाल: इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर प्रिकर्सर केमिकल्स (Precursor Chemicals) सामान्य औद्योगिक उपयोग के लिए खुले बाजार में उपलब्ध होते हैं और पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं हैं।
आसान मैन्युफैक्चरिंग: ड्रग माफिया इन्हीं लीगल केमिकल्स को अलग-अलग अनुपात में मिलाकर अवैध लैब्स में एमडी ड्रग्स तैयार कर लेते हैं। कानून की इसी ढिलाई और केमिकल्स की आसान उपलब्धता के कारण तस्कर इसे आसानी से बना लेते हैं।

कौन से लोग कर रहे हैं इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल?
एमडी ड्रग्स की शुरुआत वैश्विक स्तर पर यूरोप, कैलिफोर्निया और अमेरिका के क्लब कल्चर से हुई थी। भारत में 2017-18 में गुजरात में पहली बार इसकी बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद यह राजस्थान के युवाओं में तेजी से फैला।
हाई-प्रोफाइल सोसाइटी और यूथ: हाई-प्रोफाइल लोग, उद्योगपतियों के बच्चे और पब-क्लब जाने वाले लोग इसके मुख्य उपभोक्ता हैं।
शैक्षणिक संस्थान: बड़े शहरों के हाई-प्रोफाइल स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं इस जाल में सबसे ज्यादा फंस रहे हैं।
क्लब, रेस्ट्रो-बार और प्राइवेट पार्टीज: देर रात तक चलने वाली पब पार्टीज और फार्महाउस पार्टीज में एमडी ड्रग्स की सप्लाई सबसे अधिक पाई जाती है।
युवाओं की पहली पसंद क्यों बनता जा रहा है एमडी?
सस्ता और आसान एक्सेस: पारंपरिक ड्रग्स (जैसे कोकीन) की तुलना में यह आसानी से और कम कीमत पर उपलब्ध हो जाता है।
सूंघने और गंधहीन होने का फायदा: एमडी ड्रग्स को पाउडर, क्रिस्टल या गोली के रूप में लिया जाता है। इसमें खास गंध न होने के कारण इसे छिपाना और इस्तेमाल करना आसान होता है।
झूठी एनर्जी का अहसास: इसे लेने के बाद व्यक्ति खुद को अत्यधिक ऊर्जावान महसूस करता है, जिससे पार्टी कल्चर में शामिल युवा इसकी ओर जल्दी आकर्षित होते हैं।
स्टेटस सिंबल: हाई-प्रोफाइल सर्कल में इसे एक आधुनिक लाइफस्टाइल का हिस्सा मानकर परोसा जाता है।
क्यों सबसे ज्यादा खतरनाक है एमडी ड्रग्स?
एमडी ड्रग्स सीधा मानव के सेंट्रल नर्वस सिस्टम (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) पर हमला करता है। इसके सेवन से व्यक्ति में अत्यधिक मतिभ्रम (Hallucinations), एंग्जायटी, हिंसक व्यवहार और डिप्रेशन उत्पन्न होता है । यह दिल की धड़कन और रक्तचाप को अनियंत्रित रूप से बढ़ा देता है, जिससे कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) और ब्रेन हैमरेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। महज 2 से 3 बार के इस्तेमाल के बाद ही व्यक्ति इसका पूरी तरह आदी हो जाता है।
एमडी ड्रग्स माफिया पर पुलिस की पैनी नजर
राजस्थान सरकार और पुलिस प्रशासन ने एमडी ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। ANTF और लोकल इंटेलिजेंस लगातार ऐसे गिरोहों को चिन्हित कर रहे हैं जो कच्चे माल (केमिकल्स) की सप्लाई से लेकर एमडी की डिलीवरी में शामिल हैं। पुलिस का मुख्य ध्यान सप्लाई चेन को तोड़ना और अवैध मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को पूरी तरह ध्वस्त करना है, ताकि राज्य की युवा पीढ़ी को इस जानलेवा ‘सफेद जहर’ के प्रभाव से बचाया जा सके।