‘Expose Now’ की खोजी न्यूज़ रिपोर्ट: अंधेरे में छात्रों का भविष्य, आखिर कब खत्म होगा राजस्थान में पेपर लीक का ‘ग्रहण काल’?

-14 साल में 26 परीक्षाएं रद्द… राजनीतिक मिलीभगत व संरक्षण के चलते पेपर लीक का ‘गढ़’ बना राजस्थान

जयपुर। राजस्थान, जिसे कभी वीरों की भूमि कहा जाता था, अब ‘पेपर लीक के गढ़’ के रूप में अपनी नई और शर्मनाक पहचान बना रहा है। पिछले 14 सालों में 26 बड़ी परीक्षाओं का रद्द होना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि व्यवस्था की मिलीभगत और संगठित माफिया के खौफनाक गठजोड़ का नतीजा है। राजस्थान में सरकारी नौकरी अब सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि धैर्य और भरोसे की ‘अग्निपरीक्षा’ बन चुकी है। बीते कुछ वर्षों में एक के बाद एक भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने से प्रदेश के लाखों युवाओं के सपने बार-बार टूटे हैं। कभी शिक्षक भर्ती, कभी पटवारी, तो कभी सब-इंस्पेक्टर परीक्षा… हर बार मेहनत करने वाला अभ्यर्थी ही व्यवस्था की लापरवाही और माफियाओं के गठजोड़ का शिकार बना है। ‘Expose Now’ की खास रिपोर्ट में देखिए कैसे 5 लाख से 50 लाख तक में बिकते ईमान ने प्रदेश के 40 लाख युवाओं के सपनों को नीलाम कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की मुहर, SI भर्ती 2021 का काला अध्याय खत्म:-

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसके तहत SI भर्ती परीक्षा-2021 को रद्द कर दिया गया है। 190 गिरफ्तारियां, जिनमें 50 से ज्यादा ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर्स शामिल थे, यह बताने के लिए काफी हैं कि खाकी की नींव में ही ‘नकल का दीमक’ लग चुका था। अब सरकार सितंबर 2026 में दोबारा परीक्षा कराने की तैयारी में है, लेकिन उन अभ्यर्थियों के समय और मानसिक प्रताड़ना का हिसाब कौन देगा जो सालों से इंसाफ का इंतजार कर रहे थे?

NEET 2026: अब नेशनल लेवल पर राजस्थान का ‘दाग’:-

राजस्थान का पेपर लीक कैंसर अब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को भी अपनी चपेट में ले चुका है। 3 मई 2026 को हुई NEET UG परीक्षा को पेपर लीक के पुख्ता सबूतों के बाद रद्द करना पड़ा है। जांच की आंच सीबीआई (CBI) तक पहुंच चुकी है और जयपुर के प्रिंटिंग प्रेस से लेकर कोचिंग माफियाओं तक के तार जुड़ रहे हैं। राजस्थान SOG की जांच ने खुलासा किया है कि ‘गेस पेपर’ के नाम पर व्हाट्सएप पर सरेआम सवालों की नीलामी की गई।

5 लाख से 50 लाख तक में बिके ईमान:-

मीडिया की पड़ताल और जांच एजेंसियों के खुलासों ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। संगठित माफिया की पकड़ इतनी गहरी है कि एक-एक प्रश्नपत्र पांच से पचास लाख रुपये में बेचा जा रहा है। हाल ही में पकड़े गए सरगनाओं ने स्वीकार किया है कि वे स्कूल शिक्षकों और कोचिंग संस्थानों के साथ मिलकर इस काली कमाई के तंत्र को संचालित कर रहे थे। राजस्थान में तो इंटरनेट बंदी के दौरान भी पेपर लीक होने की घटनाओं ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बौना साबित कर दिया है।

हालिया झटके: SI और NEET ने तोड़ा भरोसा:-

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थान एसआई (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर आए रुख और फिर नीट (NEET) परीक्षा के विवाद ने छात्रों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 14 वर्षों में अकेले राजस्थान में पेपर लीक के करीब 26 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 14 मामले तो बीते महज छह वर्षों की देन हैं।

रद्द परीक्षाओं की लंबी सूची:-

राजस्थान में पेपर लीक के कारण रद्द हुई परीक्षाओं की सूची अंतहीन होती जा रही है। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

-रीट (REET) लेवल-दो 2021

-लाइब्रेरियन भर्ती 2018

-जेईएन (JEN) सिविल डिग्री परीक्षा 2018

-कांस्टेबल भर्ती 2018 और 2022

-हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती 2020

-द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2022

देशव्यापी संकट, 15 राज्यों में फैली धांधली:-

यह समस्या केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। पिछले पांच वर्षों में देश के 15 राज्यों में 41 से अधिक भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। तेलंगाना, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में भी लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। नकल माफियाओं ने पूरे देश की परीक्षा प्रणाली में सेंध लगा दी है।

सख्त कानून के बाद भी बेखौफ माफिया:-

केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘लोक परीक्षा अनुचित साधन रोकथाम विधेयक 2024’ पेश किया है, जिसमें दोषियों के लिए 10 साल तक के कारावास और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। राजस्थान सरकार ने भी पूर्व में सख्त कानून बनाकर संपत्तियों को जब्त करने की शक्ति प्राप्त की है, लेकिन धरातल पर इन नियमों का खौफ नजर नहीं आ रहा है। पेपर लीक करने वाले गिरोह अब केवल अपराधी नहीं, बल्कि एक ‘इंडस्ट्री’ की तरह काम कर रहे हैं, जिनके पास इंटरनेट बंदी के दौरान भी पेपर लीक करने के हाई-टेक तरीके मौजूद हैं।आधा दर्जन से ज्यादा वांटेड अपराधी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।

“करोड़ों छात्रों की मेहनत पर फिरा पानी, पिछले पांच वर्षों में राजस्थान के करीब 40 लाख विद्यार्थियों का भविष्य इन घटनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है।”

Expose Now का सवाल:-

क्या सख्त कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे? आखिर कब तक राजस्थान का युवा अपनी मेहनत की आहुति इन ‘नकल माफियाओं’ के हवन कुंड में देता रहेगा? संसद से सड़क तक न्याय की पुकार है, लेकिन समाधान अब भी कोसों दूर नजर आता है।

Share This Article
Leave a Comment