कोटा। राजस्थान में चंबल सेंचुरी के सीने को छलनी कर रहे बजरी माफियाओं के खिलाफ अब ‘फाइनल स्ट्राइक’ की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की सुस्ती पर ऐसी कड़ी फटकार लगाई है कि पूरा प्रशासनिक अमला हिल गया है। खान एवं भू-विज्ञान विभाग द्वारा जारी ‘नो कंपाउंडिंग’ (बिना रिहाई) का आदेश इसी भारी दबाव का नतीजा है।
सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा, “प्रशासनिक लकवा और संवेदनहीनता”:-
14 मई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान सरकार को आड़े हाथों लिया। कोर्ट की कुछ सख्त टिप्पणियाँ जो अब सुर्खियाँ बन रही हैं:
-“संस्थागत लकवा”: कोर्ट ने राजस्थान सरकार के रवैये को ‘प्रशासनिक लकवा’ (Institutional Paralysis) करार दिया।
-“मूक दर्शक नहीं रहेंगे”: कोर्ट ने साफ कहा कि माफिया खुलेआम सेंचुरी को तबाह कर रहे हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती।
-अधिकारियों की पेशी: कोर्ट ने राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), खनन सचिव, और परिवहन सचिव सहित कई दिग्गजों को 20 मई को निजी तौर पर कोर्ट में पेश होने का फरमान सुनाया है।
विभाग का नया ‘ब्रह्मास्त्र’: गाड़ी पकड़ी तो समझो गई:-
जो आदेश आप देख रहे हैं, वह दरअसल सुप्रीम कोर्ट की इसी सख्ती का असर है। इस आदेश के बाद अब खेल बदल गया है। पहले माफिया पकड़े जाने पर कुछ जुर्माना भरकर अपनी मशीनें छुड़ा लेते थे। अब चंबल क्षेत्र के 5 जिलों (धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा) में पकड़ी गई गाड़ियाँ राजसात (जब्त) होंगी, छोड़ी नहीं जाएंगी। 17 अप्रैल के आदेश के अनुसार, अब उन सभी रास्तों पर हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं जहाँ से अवैध बजरी का परिवहन होता है। कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो चंबल में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी जाएगी।
क्यों मचा रहा है इतना बवाल?
यह मामला केवल रेत का नहीं है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का है। चंबल सेंचुरी दुनिया भर में लुप्तप्राय घड़ियालों और गंगा डॉल्फिन के लिए जानी जाती है। अवैध खनन इनकी नस्ल खत्म कर रहा है। अवैध खनन के कारण धौलपुर-मुरैना बॉर्डर पर स्थित चंबल के बड़े पुलों की नींव कमजोर हो रही है, जिससे NHAI भी चिंतित है। इस अवैध धंधे को रोकने की कोशिश में हाल ही में दो फॉरेस्ट गार्ड्स (हरिकेश गुर्जर और जितेंद्र सिंह शेखवत) अपनी जान गंवा चुके हैं।
Expose Now का तीखा सवाल:-
क्या अतिरिक्त निदेशक एम.पी. मीणा का यह कागज पर निकला आदेश धरातल पर बजरी के ट्रैक्टरों को रोक पाएगा? या फिर हर बार की तरह निचले स्तर के अधिकारी और पुलिस माफियाओं के साथ मिलकर ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का खेल जारी रखेंगे? 20 मई को जब राजस्थान के बड़े अफसर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर खड़े होंगे, तब ‘Expose Now’ आपको पल-पल की अपडेट देगा।
देखते रहिए ‘Expose Now’ – क्योंकि हम सच दिखाते नहीं, उजागर करते हैं!
