-एक ही दिन में 1600 किमी दूर से पाइप आ भी गए और भुगतान भी हो गया
-मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने एक ही प्रोजेक्ट में किए एक दर्जन फर्जीवाड़े
उदयपुर/जयपुर। ‘EXPOSE NOW’ की विशेष पड़ताल में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत राजस्थान के उदयपुर संभाग में चल रहे एक और बड़े घोटाले का कच्चा चिट्ठा सामने आया है। 98.29 करोड़ रुपये के एक ही बड़े प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के एक दर्जन से ज्यादा सुराख मिले हैं। जहाँ एक तरफ सोम-कमला-अम्बा बांध परियोजना में देरी और अनियमितताओं के आरोप हैं, वहीं उदयपुर परियोजना खंड-द्वितीय के अधिकारियों ने संवेदक पर ऐसी ‘अंधी’ मेहरबानी दिखाई कि बिना काम हुए ही 2.83 करोड़ का भुगतान कर दिया।

ऑडिट रिपोर्ट का धमाका, ‘जादुई’ रफ़्तार से बांटे करोड़ों:-
‘EXPOSE NOW’ के पास मौजूद दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि विभाग के इंजीनियर्स ने संवेदक को फायदा पहुँचाने के लिए नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं।
- 1600 किमी का सफर… और चंद घंटों में भुगतान !
ऑडिट में पाया गया कि DI पाइप 1634 किमी और HDPE पाइप 553 किमी दूर से आने थे। हैरानी की बात यह है कि जिस तारीख को पाइप के बिल (Invoice) कटे, उसी तारीख को माल साइट पर पहुँच गया, उसकी जांच और माप हो गई और अगले ही दिन संवेदक को 32,40,526 का भुगतान भी कर दिया गया। इतनी लंबी दूरी से एक ही दिन में माल की आपूर्ति और भुगतान होना सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
- खाली पड़ी ‘माप पुस्तिका’, फिर भी संवेदक करोड़ों का भुगतान:-
HDPE पाइपों को जोड़ने, बिछाने और टेस्टिंग के नाम पर संवेदक को ₹75,61,567 का भुगतान किया गया। लेकिन जब ऑडिट टीम ने रिकॉर्ड खंगाला, तो माप पुस्तिका संख्या 51 का पन्ना संख्या 01 पूरी तरह खाली मिला। बिना किसी रिकॉर्ड और बिना काम के यह भुगतान सीधे तौर पर सरकारी खजाने की लूट है।
- नल कनेक्शन के नाम पर 1.75 करोड़ का ‘गिफ्ट’:-
घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) के मद में 1,75,83,526 का भुगतान तब किया गया जब न तो सामग्री का कोई बिल उपलब्ध था और न ही स्टोर रजिस्टर में कोई एंट्री मिली। नियम के अनुसार 80% भुगतान कनेक्शन लगने के बाद होना था, लेकिन अधिकारियों ने काम शुरू होने से पहले ही पैसा लुटा दिया।
- इंजीनियर्स की मेहरबानी या गहरी साजिश?
लोक निर्माण लेखा नियमों के अनुसार, उपखंडीय अधिकारी माप और गणना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होता है। लेकिन उदयपुर के इस खंड में अधिकारियों ने संवेदक को ‘अदेय लाभ’ पहुँचाने के लिए नियमों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।
उदयपुर के इस प्रोजेक्ट में अनुबंध की शर्तों (Clause 16.1 B) को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। 25 किमी से ज्यादा पाइप स्टॉक में होने पर भुगतान नहीं किया जा सकता था, फिर भी संवेदक को अदेय लाभ पहुँचाया गया।

अगली कड़ी में बड़ा धमाका, प्राइस वेरिएशन का ‘फर्जी’ खेल:-
उदयपुर संभाग के इंजीनियर्स और ठेका फर्म के बीच की यह साठगांठ यहीं खत्म नहीं होती। ‘EXPOSE NOW’ पर 98.29 करोड़ के इस एक ही प्रोजेक्ट में हुए 32 करोड़ से ज्यादा के घोटाले के हर ‘खेल’ को उजागर किया जाएगा। अगले अंक में देखिए, कैसे मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर ‘प्राइस वेरिएशन’ (Price Variation) के नाम पर फर्जी तरीके से करोड़ों का भुगतान उठा लिया । कैसे बाजार की कीमतों और सरकारी आंकड़ों के साथ हेरफेर कर जनता की कमाई को लूटा गया? भ्रष्टाचार के इस बड़े सिंडिकेट का पूरा कच्चा चिट्ठा जल्द ही आपके सामने होगा। देखते रहिए… EXPOSE NOW
Expose Now के महा-खुलासे का Part-1 पढ़ने के लिए क्लिक करें
Expose Now के महा-खुलासे का Part-2 पढ़ने के लिए क्लिक करें
