“जन्मदिन भी संघर्ष के नाम”: जल भवन में धरने पर बैठे PHED ठेकेदारों ने सरकार को ललकारा

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित जल भवन में प्रदेश भर के PHED ठेकेदारों का विरोध प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। अपनी वाजिब मांगों और रुके हुए भुगतान को लेकर ठेकेदारों का अनिश्चितकालीन धरना आज पांचवें दिन भी जारी रहा। प्रदेश के कोने-कोने से आए ठेकेदार इस चिलचिलाती गर्मी में भी अपने हक के लिए जल भवन परिसर में डटे हुए हैं।

धरना स्थल पर मनाया गया जन्मदिन

आज का दिन आंदोलनकारियों के लिए भावनात्मक रहा। ‘ऑल राजस्थान PHED कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन’ के प्रदेशाध्यक्ष अमरचंद विश्नोई का जन्मदिन आज धरना स्थल पर ही मनाया गया। संघर्षरत ठेकेदारों ने एकजुटता दिखाते हुए धरना स्थल पर ही केक कटवाया और अपने नेता को जन्मदिन की बधाई दी। ठेकेदारों ने संदेश दिया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

“मेहनत हमारी, बेबसी क्यों?”

आंदोलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता के लिए ‘जल जीवन मिशन’ का जो सपना देखा था, उसे धरातल पर उतारने के लिए PHED के ठेकेदारों ने दिन-रात एक कर दिया। विषम परिस्थितियों और रेगिस्तान की तपती रेत के बीच पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक पानी पहुँचाने का काम किया गया। लेकिन आज वही ठेकेदार भुगतान के अभाव में बेबस हैं।

प्रमुख मांगें और चेतावनी

ठेकेदारों की मुख्य मांग है कि बजट का तुरंत आवंटन कर बकाया भुगतान किया जाए और जीएसटी (GST) से संबंधित जटिलताओं को समाप्त कर एक निश्चित समय सीमा में भुगतान प्रक्रिया तय की जाए। ठेकेदारों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा:

“यह सिर्फ ठेकेदारों की लड़ाई नहीं है, बल्कि उस हर घर की लड़ाई है जहाँ नल से पानी पहुँचा है। आज जो चिंगारी सुलग रही है, वह कल भयंकर आग बन सकती है। यदि भुगतान नहीं हुआ, तो आगामी समय में जनता को भीषण जल किल्लत का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”

आंदोलन की हुंकार \ विशेष कविता

रेगिस्तान की तपती रेत में, हमने पसीना बहाया है, हर घर की दहलीज तक, अमृत जल पहुँचाया है। मोदी जी का सपना हमने, जी-जान लगा पूरा किया, पर आज उसी मेहनत का, हक सरकार ने दबा दिया।

पांच दिनों से जल भवन में, हम सब डटे हुए हैं, अपने वाजिब बजट के लिए, देखो आज रुके हुए हैं। जन्मदिन भी मना यहीं पर, संघर्ष हमारा भारी है, अभी तो ये बस चिंगारी है, अब आग की तैयारी है।

जीएसटी और बजट का, जल्दी करो भुगतान तुम, ठेकेदारों की बेबसी का, मत लो इम्तिहान तुम। वरना चक्का जाम होगा, और जनता प्यासी तड़पेगी, ये ठेकेदारों की आवाज अब, इतिहास नया ही लिखेगी!

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