पचपदरा रिफाइनरी से राजस्थान ने रचा नया इतिहास, अब बाड़मेर-सांचौर बेसिन से 3 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन का लक्ष्य

बाड़मेर। राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक माने जा रहे पचपदरा रिफाइनरी के शुभारंभ के साथ ही राज्य में कच्चे तेल की रिफाइनिंग का नया दौर शुरू हो गया है। अब सरकार और तेल कंपनियों का पूरा फोकस बाड़मेर-सांचौर बेसिन से कच्चे तेल के उत्पादन को कई गुना बढ़ाने पर है। वर्तमान में इस क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 70 से 80 हजार बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है, जिसे आगामी वर्षों में बढ़ाकर 3 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।

इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए बाड़मेर-सांचौर बेसिन में करीब 1000 नए तेल कुओं की ड्रिलिंग शुरू की जा रही है। इसके लिए लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजस्थान न केवल देश के प्रमुख तेल उत्पादक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

पचपदरा रिफाइनरी

देश के कुल उत्पादन का 35 प्रतिशत तेल देता है बाड़मेर बेसिन

बाड़मेर बेसिन देश के सबसे बड़े ऑनशोर तेल उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है। वर्ष 2025 में यहां से 10.2 मिलियन टन कच्चे तेल का उत्पादन हुआ, जो भारत के कुल कच्चे तेल उत्पादन का लगभग 35 प्रतिशत है।

इसके मुकाबले गुजरात के कैम्बे बेसिन और उससे जुड़े बॉम्बे हाई क्षेत्र से 8.6 मिलियन टन कच्चे तेल और लगभग 18 क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन हुआ, जबकि असम के ऊपरी असम शेल्फ क्षेत्र से 4.8 मिलियन टन कच्चे तेल की आपूर्ति दर्ज की गई।

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रिफाइनरी की जरूरत पूरी करने के लिए बढ़ाना होगा उत्पादन

पचपदरा रिफाइनरी की वार्षिक क्षमता 9 मिलियन टन है। इसमें से लगभग 7.5 मिलियन टन कच्चा तेल विदेशों से आयात किया जाएगा, जबकि 1.5 मिलियन टन तेल बाड़मेर-सांचौर बेसिन से उपलब्ध कराया जाएगा।

इसी आवश्यकता को देखते हुए स्थानीय तेल उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। वर्ष 2018 में इस क्षेत्र में 11 नए तेल ब्लॉक आवंटित किए गए थे और खोज क्षेत्र का विस्तार बढ़ाकर 6411 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया। हालांकि अब तक इन नए क्षेत्रों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है।

नई तकनीकों से बढ़ाई जाएगी तेल रिकवरी

तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनियां आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रही हैं। वर्तमान में विश्व स्तर पर तेल रिकवरी की औसत दर 35 से 40 प्रतिशत मानी जाती है।

बाड़मेर-सांचौर बेसिन में इनहेंस्ड ऑयल रिकवरी (EOR), पॉलीमर इंजेक्शन और अल्कलाइन सर्फेक्टेंट पॉलीमर (ASP) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से रिकवरी दर में लगभग 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त वृद्धि करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भूमिगत तेल भंडार का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

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550 तेल कुएं पहले से जुड़े, अब 1000 नए कुएं खोदे जाएंगे

फिलहाल बाड़मेर-सांचौर बेसिन के करीब 550 तेल कुओं को मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल (MPT) के माध्यम से पचपदरा रिफाइनरी से जोड़ा जा चुका है।

इस क्षेत्र के मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या ऑयल फील्ड देश के सबसे महत्वपूर्ण तेल क्षेत्रों में शामिल हैं। अब इन क्षेत्रों के अलावा लगभग 1000 नए कुएं खोदे जाएंगे, जिनसे उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।

3 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन का रोडमैप तैयार

केयर्न वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने हाल ही में घोषणा की थी कि बाड़मेर-सांचौर बेसिन से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर 3 लाख बैरल प्रतिदिन करने की दिशा में बड़े स्तर पर कार्य किया जाएगा।

यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो राजस्थान देश के ऊर्जा मानचित्र पर और अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगा तथा आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राजस्थान को होंगे बड़े आर्थिक लाभ

पचपदरा रिफाइनरी और तेल उत्पादन में वृद्धि से राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा राज्य के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऊर्जा क्षेत्र में यह परियोजना राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।


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