आपका चेहरा, ठगों का मोहरा: 80s रेट्रो लुक के नाम पर कहीं आपको न बना दे ‘Nostalgia Scam’ का शिकार

जयपुर: सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980 के दशक (80s) के विंटेज और रेट्रो लुक वाली तस्वीरें ट्रेंड कर रही हैं। राजस्थान सहित देशभर में करोड़ों लोग अपनी और अपने परिजनों की तस्वीरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) टूल्स के जरिए पुराने जमाने के लुक में बदलकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप पर साझा कर रहे हैं। दिखने में बेहद आकर्षक और पुरानी यादों को ताजा करने वाला यह चलन अब साइबर अपराधियों का नया हथियार बन चुका है। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस विभागों ने इसे ‘Nostalgia Scam’ (नॉस्टेल्जिया स्कैम) का नाम देकर आम जनता के लिए अलर्ट जारी किया है।

क्या है ‘नॉस्टेल्जिया स्कैम’ और कैसे बिछाया जाता है जाल?

नॉस्टेल्जिया स्कैम साइबर ठगी का वह तरीका है, जिसमें ठग इंसानी भावनाओं और पुरानी यादों (Nostalgia) के आकर्षण का मनोवैज्ञानिक लाभ उठाते हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया और वॉट्सऐप पर ऐसे लिंक और संदेश प्रसारित करते हैं, जिनमें दावा किया जाता है:

  • “अपनी फोटो या वीडियो को फ्री में 80 के दशक का रेट्रो लुक दें।”
  • “AI के जरिए अपने परिवार की पुरानी यादें फिर से जीवंत करें।”
  • “1980s स्टाइल हाई-क्वालिटी विंटेज पोर्ट्रेट सिर्फ एक क्लिक में तैयार करें।”

जैसे ही कोई यूजर दिए गए लिंक पर क्लिक करता है, उसे सीधे किसी ऐप स्टोर पर भेजने के बजाय एक थर्ड-पार्टी APK फाइल डाउनलोड करने को कहा जाता है। यह ऐप इंस्टॉल होते ही यूजर से गैलरी, कैमरा, कॉन्टैक्ट्स और SMS/स्टोरेज की एक्सेस परमिशन मांग लेता है। परमिशन मिलते ही डिवाइस में मैलवेयर सक्रिय हो जाता है, जो बैकग्राउंड में बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, निजी दस्तावेज और वन टाइम पासवर्ड (OTP) चुराकर सीधे साइबर अपराधियों के सर्वर पर भेज देता है। इसके बाद पीड़ितों के बैंक खातों से भारी रकम उड़ा ली जाती है।

विभिन्न राज्यों की पुलिस ने जारी की आधिकारिक एडवाइजरी

इस बढ़ते खतरे को देखते हुए कई राज्यों की साइबर सेल और अपराध जांच इकाइयों ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • झारखंड (बोकारो साइबर पुलिस): बोकारो साइबर थाना प्रभारी पवन कुमार के अनुसार, किसी भी अनजान ऐप पर हाई-रिज़ॉल्यूशन चेहरा अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी की समीक्षा अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर चेहरे की स्पष्ट तस्वीरें देने से बायोमेट्रिक डेटा चोरी और फर्जी प्रोफाइल बनने की संभावना बढ़ जाती है।
  • हिमाचल प्रदेश (स्टेट CID साइबर क्राइम ब्यूरो): पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी के नेतृत्व में सीआईडी साइबर क्राइम ब्यूरो ने विशेष चेतावनी जारी करते हुए आम जनता से कहा है—“सोचें, समझें, फिर अपलोड करें।” पुलिस ने विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं की निजी तस्वीरें अनजान प्लेटफॉर्म्स पर साझा न करने की ताकीद की है, जिससे उनका दुरुपयोग ब्लैकमेलिंग और डीपफेक में न हो सके।
  • उत्तर प्रदेश (मुरादाबाद पुलिस): एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह और साइबर क्राइम टीम ने बताया कि वॉट्सऐप पर एपीके फाइलों के जरिए फोन पूरी तरह हैक किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने जनता को आगाह किया कि केवल गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर जैसे प्रमाणित प्लेटफॉर्म्स के अलावा कहीं से भी थर्ड-पार्टी ऐप्स इंस्टॉल न करें।
  • तेलंगाना और कर्नाटक: तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TGCSB) तथा कर्नाटक पुलिस ने भी सार्वजनिक एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को रेट्रो लुक देने वाले संदेहास्पद सोशल मीडिया फिल्टर्स और बॉट्स से दूर रहने की हिदायत दी है।

मुख्य तकनीकी खतरे: बायोमेट्रिक लीक और डीपफेक

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे ट्रेंड का सबसे संवेदनशील पहलू चेहरे का बायोमेट्रिक डेटा है:

खतरासंभावित प्रभाव
बायोमेट्रिक डेटा चोरीChatGPT या अन्य अनवेरिफाइड टूल्स पर अपलोड की गई असली हाई-डेफिनिशन तस्वीरों से फेशियल नोड्स और बायोमेट्रिक प्रोफाइल निकाली जा सकती है।
डीपफेक और ब्लैकमेलिंगस्पष्ट तस्वीरों का इस्तेमाल चेहरे की मॉर्फिंग कर आपत्तिजनक वीडियो या ऑडियो-विजुअल डीपफेक बनाने में हो सकता है।
सिंथेटिक आइडेंटिटी थेफ्टचोरी किए गए फेशियल डेटा का उपयोग फर्जी ई-केवाईसी (e-KYC), सिम कार्ड जारी कराने और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की आवश्यक सावधानियां

  1. अनजान APK फाइल्स से बचें: वॉट्सऐप, टेलीग्राम या सोशल मीडिया कमेंट्स में आने वाले किसी भी डायरेक्ट डाउनलोड लिंक या .apk फाइल पर क्लिक न करें।
  2. अनावश्यक परमिशन अस्वीकार करें: फोटो एडिटिंग ऐप्स को कॉन्टैक्ट लिस्ट, माइक्रोफोन, लोकेशन और SMS पढ़ने की अनुमति कभी न दें।
  3. प्राइवेसी सेटिंग्स जांचें: किसी भी AI जनरेटर का इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि कंपनी आपके चेहरे के डेटा को ट्रेनिंग मॉडल के लिए स्टोर तो नहीं कर रही है।
  4. सत्यापित ऐप्स का ही उपयोग: केवल आधिकारिक ऐप स्टोर्स से ही उच्च रेटिंग और प्रामाणिक डेवलपर वाले टूल्स डाउनलोड करें।

ठगी होने पर क्या करें?

यदि कोई व्यक्ति अनजाने में इस स्कैम का शिकार हो जाता है या बैंक खाते से अनाधिकृत लेनदेन हो जाता है:

  • तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
  • केंद्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।
  • अपने संबंधित बैंक को सूचित कर नेट बैंकिंग और डेबिट/क्रेडिट कार्ड को तुरंत ब्लॉक कराएं।

👇 हमारी मुहिम से जुड़ें:

🛑 भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करें!

क्या आपके पास किसी घोटाले की पुख्ता जानकारी है? हमारे 'Secure Drop' पर भेजें। आप नाम बताएँ या पहचान छुपाएँ, यह आपकी मर्जी है। सच को दुनिया के सामने लाना हमारी जिम्मेदारी है।

🔗 सुरक्षित रूप से रिपोर्ट करें

Share This Article
Leave a Comment