जयपुर: महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राजस्थान के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने लेकर आई है। वर्ष 2023 के बाद अब पहली बार जारी NCRB के नए अपराध आंकड़ों में राजस्थान महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों के कई प्रमुख मामलों में देश के शीर्ष राज्यों में दिखाई दे रहा है। बलात्कार और महिलाओं की लज्जा भंग के मामलों में राजस्थान की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से करीब तीन गुना तक अधिक है। वहीं बलात्कार के प्रयास के मामलों में भी राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है।
NCRB के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 में राजस्थान में बलात्कार के 4,871 मामले दर्ज हुए, जिनमें 4,888 पीड़िताएं शामिल हैं। राज्य की अपराध दर 12.2 रही, जबकि देश की औसत अपराध दर 4.3 है। यानी इस अपराध की दर राष्ट्रीय औसत के मुकाबले लगभग तीन गुना है। आंकड़ों के लिहाज से राजस्थान इस श्रेणी में देश के सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शीर्ष पर है।


लज्जा भंग के मामलों में भी राजस्थान की स्थिति गंभीर
महिलाओं के साथ आपराधिक बल प्रयोग अथवा लज्जा भंग के मामलों ने भी चिंता बढ़ाई है। 2024 में राजस्थान में ऐसे 8,276 मामले दर्ज किए गए और 8,310 महिलाएं पीड़ित हुईं। इस अपराध की राज्य में अपराध दर 20.7 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत महज 6.9 है।
यानी महिलाओं की लज्जा भंग से जुड़े अपराधों की दर राजस्थान में राष्ट्रीय औसत से करीब तीन गुना है। यह आंकड़ा कानून-व्यवस्था के साथ-साथ महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
रेप की कोशिश में राजस्थान नंबर-2
बलात्कार के प्रयास के मामलों में भी राजस्थान की स्थिति राहत देने वाली नहीं है। NCRB के अनुसार वर्ष 2024 में राज्य में 778 मामले दर्ज हुए और 797 पीड़िताएं सामने आईं। राजस्थान की अपराध दर 1.9 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 0.4 है। इस श्रेणी में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा।
इसके अलावा वर्ष 2024 में राज्य में यौन उत्पीड़न के 1,381 मामले भी दर्ज किए गए। इन मामलों की अपराध दर 3.4 रही, जो राष्ट्रीय औसत 2.3 से अधिक है।
NCRB 2024 रिपोर्ट: राजस्थान बनाम अखिल भारत (तुलनात्मक डेटा)
- बलात्कार (376 IPC / Sec 64-71 BNS):
- राजस्थान: 4,871 मामले (पीड़िताएं: 4,888) | अपराध दर: 12.2 (देश में शीर्ष)
- अखिल भारत: 29,536 मामले | राष्ट्रीय अपराध दर: 4.3
- बलात्कार का प्रयास (Attempt to Commit Rape):
- राजस्थान: 778 मामले (पीड़िताएं: 797) | अपराध दर: 1.9 (देश में दूसरा स्थान)
- अखिल भारत: 2,561 मामले | राष्ट्रीय अपराध दर: 0.4
- महिला की लज्जा भंग (354 IPC / Sec 74 BNS):
- राजस्थान: 8,276 मामले (पीड़िताएं: 8,310) | अपराध दर: 20.7 (देश में शीर्ष)
- अखिल भारत: 46,152 मामले | राष्ट्रीय अपराध दर: 6.9
- यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment):
- राजस्थान: 1,381 मामले | अपराध दर: 3.4
- अखिल भारत: 15,207 मामले | राष्ट्रीय अपराध दर: 2.3

अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान में क्यों बढ़ रहे हैं आपराधिक मामले?
विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में इन आंकड़ों के उच्च होने के पीछे कई सामाजिक, प्रशासनिक और कानूनी कारण जिम्मेदार हैं:
- पारदर्शिता और अनिवार्य एफआईआर (Mandatory Registration): पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान पुलिस द्वारा ‘हर पीड़ित की एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य’ करने की नीति लागू की गई है। इससे पहले जो मामले थाने की देहरी पर दब जाते थे, वे अब आधिकारिक आंकड़ों में दर्ज हो रहे हैं।
- सामाजिक और आर्थिक कारक: ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की कमी, पुरुष प्रधान मानसिकता, बेरोजगारी और पारिवारिक द्वेष के चलते महिला अत्याचार के मामलों में वृद्धि हुई है।
- त्वरित न्याय और पुलिसिंग की चुनौतियाँ: हालांकि पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के दावे किए जाते हैं, लेकिन मामलों के निस्तारण में देरी और अदालती प्रक्रिया लंबी होने के कारण अपराधियों के मन में अपेक्षित खौफ नजर नहीं आता है।