करौली : कलेक्ट्रेट में बंद का ऐलान UGC के नए नियमों को सवर्ण समाज ने बताया “काला कानून”

करौली, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में लागू किए गए नए नियमों के विरोध में आज करौली जिला मुख्यालय पर सवर्ण समाज ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। समाज के सैकड़ों लोगों ने शहर में रैली निकाली और कलेक्ट्रेट परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इन्हें वापस नहीं लिया गया, तो 1 फरवरी को भारत बंद किया जाएगा।

‘मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारों से गूंजा शहर

सवर्ण समाज के सदस्यों ने अपनी रैली की शुरुआत मदनमोहन जी मंदिर के पास पुरानी नगर पालिका क्षेत्र से की। यह रैली फूटाकोटा, बड़ा बाजार, वजीरपुर गेट और पुरानी कलेक्ट्रेट चौराहे से होती हुई कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सवर्ण समाज की प्रमुख आपत्तियां:

प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों को सवर्ण समाज के हितों पर कुठाराघात बताया। उनके मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:

  • संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी: वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नए नियम केवल SC, ST, OBC और दिव्यांग छात्रों पर केंद्रित हैं, जिससे सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है।
  • इक्विटी कमेटियों पर सवाल: नियमों के तहत गठित होने वाली इक्विटी कमेटियों को बिना किसी दंडात्मक प्रावधान के जांच का अधिकार देना खतरनाक हो सकता है। समाज का मानना है कि इससे दुर्भावनापूर्ण शिकायतों को बढ़ावा मिलेगा और शैक्षणिक संस्थानों में भय का माहौल बनेगा।
  • सामाजिक असंतुलन: प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि कानून सभी वर्गों के लिए न्यायसंगत होना चाहिए, न कि सामाजिक संतुलन बिगाड़ने वाला।

कलेक्ट्रेट में हनुमान चालीसा का पाठ

विरोध का एक अनूठा पहलू तब देखने को मिला जब सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में बैठकर सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने भगवान से सरकार को “सद्बुद्धि” देने की प्रार्थना की है ताकि वह इस काले कानून को वापस ले।

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन और भारत बंद की चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में सवर्ण समाज ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) हेमराज परडिवाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो 1 फरवरी को देशव्यापी विरोध के तहत भारत बंद का आह्वान किया जाएगा।

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