करौली- करौली चिकित्सा विभाग में ‘EXPOSE NOW’ द्वारा उजागर किए गए ‘ऑपरेशन महाघोटाला’ (शीर्षक: भ्रष्टाचार का दीमक जिसने नियमों को कुचलकर सरकारी खजाने में लगाई करीब 33 लाख रुपए की सेंध) का जबरदस्त असर देखने को मिला है। खबर प्रकाशित होने के बाद निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, राजस्थान ने तुरंत एक्शन लेते हुए करौली सीएमएचओ (CMHO) को सख्त पत्र जारी किया है। निदेशालय ने घोटाले की जांच करवाकर संबंधित दोषी अधिकारियों और कार्मिकों से गबन की गई राशि की वसूली करने, सख्त विभागीय कार्रवाई करने और गबन की राशि नही चुकाने पर पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर पालना रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं।

हालांकि, आदेश जारी होने के साथ ही स्थानीय स्तर पर मिलीभगत और जयपुर में मंत्रालय के गलियारों में एक ‘रसूखदार अर्दली’ की भूमिका भी बेनकाब हो गई है।
जांच का विरोधाभास: आरोपी के साथी ही करेंगे जांच?
निदेशालय ने कार्रवाई के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन जांच की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
मिलीभगत का संदेह: निदेशालय ने कार्रवाई का जिम्मा मौजूदा सीएमएचओ डॉ. जयंती लाल मीणा पर छोड़ा है। विडंबना यह है कि सीएमएचओ पर खुद गुढ़ाचंद्रजी ब्लॉक सीएमएचओ (BCMO) डॉ. जगराम मीणा के साथ मिलीभगत के आरोप पूर्व में ही लग चुके हैं। जिस अधिकारी (BCMO) के खिलाफ पत्र जारी हुआ है, वह वर्तमान में उसी पद पर कार्यरत है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या एक अधीनस्थ अधिकारी के सामने जांच दल निष्पक्ष जांच कर पाएगा?

आदेश जारी लेकिन अभीतक पद पर तैनात ब्लॉक सीएमएचओ।
आदेश जारी होगे गये लेकिन आश्चर्यजनक बात तो यह सामने निकलकर सामने आई की जब आडिट जांच ने लाखों रूपए का गबन का मामला मान लिया है.फिर अबतक ब्लॉक सीएमएचओ डाक्टर जगराम मीना को पद से क्यो नही हटाया? इतना ही नही पूर्व मे तत्कालीन ब्लॉक सीएमएचओ राजेश मीना मंत्री से लेकर विभाग के उच्च अधिकारियों तक वर्तमान सीएमएचओ की कार्यप्रणाली और गबन और विभागीय आदेशों की अनदेखी की शिकायत के बाबजूद अबतक चिकित्सा एव स्वास्थ्य महकमा इतना मेहरबान कैसे?


कागजों में हेराफेरी शुरू:
चिकित्सा सूत्रों के मुताबिक, खबर छपते ही BCMO डॉ. जगराम मीणा और घोटाले में शामिल अन्य कार्मिकों के होश उड़ गए हैं। वे रातों-रात साठगांठ कर ‘लीपापोती’ में जुट गए हैं। आरोप है कि डीडी पावर (DD Power) और आदर्श आचार संहिता के दौरान नियमों के विरुद्ध ज्वाइनिंग कर सरकार और चुनाव आयोग के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। अब जांच दल को गुमराह करने के लिए बैकडेट में कागजों की पूर्ति की जा रही है। आशंका है कि जब तक मीडिया की नजर है, तब तक जांच का दिखावा होगा और फिर फौरी कार्रवाई कर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा।
मंत्री और PHS की आंख में धूल झोंकने वाला ‘अर्दली’ बेनकाब
इस पूरे प्रकरण में जयपुर मुख्यालय पर तैनात एक रसूखदार ‘अर्दली’ की भूमिका ने सबको चौंका दिया है।
- मंत्री को अंधेरे में रखा: 16 अक्टूबर से 12 नवंबर तक कोटा जोन की टीम ने गुढ़ाचंद्रजी BCMO कार्यालय की ऑडिट की थी, जिसमें डॉ. जगराम मीणा द्वारा फाइनेंशियल गबन की पुष्टि हो चुकी थी। इसके बावजूद, 26 नवंबर 2025 को उन्हें BCMO का पद दे दिया गया।
- “पता नहीं यह अर्दली कब से खेल कर रहा है”: सूत्रों के मुताबिक, EXPOSE NOW की खबर के बाद यह मामला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और सीएमओ (CMO) के जरिए सीधे चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर तक पहुंचा। मंत्री ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा, “पता नहीं यह अर्दली कब से मुझे जानकारी दिए बिना अधिकारियों पर दबाव डालकर सीधे चहेतों के आदेश करवा रहा है।”
- एक्शन: मंत्री ने अर्दली को फटकार लगाते हुए मंत्री की बिना परमिशन के कोई भी फाईल नही चलाने के साथ उसे कामकाज से दूर कर दिया है। वहीं, सीएम भजनलाल शर्मा ने अर्दली की छुट्टी करने के सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
“मैं हूँ, संभाल लूँगा”: अर्दली का पुराना रिकॉर्ड
यह अर्दली लंबे समय से भ्रष्ट अधिकारियों का ‘कवच’ बना हुआ था। उसका दावा रहता था- “यह राजस्थान है, विभाग की रोज खबरें आती हैं, क्या फर्क पड़ता है, मैं हूँ संभाल लूँगा।”
पुराने दागियों को बचाया: पूर्व में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. दिनेश चंद मीणा और बाबू इमरान खान पर एक महिला चिकित्सक को प्रताड़ित करने और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे थे। निदेशालय की जांच में वे दोषी भी पाए गए, तत्कालीन सीएमएचओ को निलबिंत करने की निदेशालय से गठित जांच कमेटी ने जांच रिपोर्ट सौपी लेकिन तत्कालीन सीएमएचओ पर मेहरबानी दिखाई गयी और सिर्फ एपीओ किया और बाबू को सस्पेंड किया गया। 16 और 17 सीसीए की चार्जशीट देने की सिफारिश हुई। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, लेकिन इसी अर्दली ने मंत्री को गुमराह कर उनका लगातार बचाव किया।
बाबू इमरान को अभयदान देने की कोशिश।
इस अर्दली की भूमिका यहा पर ही खत्म नही हुई बल्कि बाबू इमरान खान को निलंबित करने के बाद निदेशालय ने करौली सीएमएचओ को आरोप पत्र जारी करने के लिए रिपोर्ट भरकर भेजने के आदेश दिये. लेकिन वह रिपोर्ट लगातार कई महीनो तक दबाकर रखी गई। उसके बाद बाबू इमरान खान जयपुर के रेट कोर्ट से अपने स्थगन आदेश ले आया। कोर्ट ने अपने आदेशों मे साफ लिखा था की बाबू को जब आरोप पत्र ही जारी नही किया गया है तो उसको इतने महिने तक निलंबित क्यो किया? आखिरकार कोर्ट ने बाबू को आरोप पत्र के अभाव मे स्टे दे दिया। जबकी निदेशालय के मुताबिक करौली सीएमएचओ डॉक्टर जयंती लाल मीणा को बाबू के खिलाफ आरोप पत्र भरकर निदेशालय को भेजने के मौखिक और लिखित आदेश दिए गये. फिर मंत्री गजेंद्र सिंह की दखल के बाद बाबू इमरान खान के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया. उसमे भी कही ना कही प्रेशर और दबाव की अर्दली की भूमिका साफ नजर आई.
महिला आयोग के आदेश रद्दी की टोकरी में:
राष्ट्रीय महिला आयोग ने बाबू इमरान खान पर सख्त कार्रवाई करते हुए उसका तबादला बाड़मेर, जोधपुर या डूंगरपुर करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अर्दली के रसूख के चलते वह आदेश भी फाइलों में दब गया।
वर्तमान CMHO के खिलाफ भारी आक्रोश, फिर भी अभयदान
अर्दली की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वर्तमान कार्यवाहक सीएमएचओ डॉ. जयंती लाल मीणा को हर तरफ से विरोध के बावजूद बचाया जा रहा है।
विधायक और कलेक्टर नाराज:
करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर सीएमएचओ की कार्यप्रणाली से इतने नाराज हैं कि उन्होंने विधानसभा में प्रश्न लगाने की चेतावनी दे दी। वहीं, जिला कलेक्टर ने खुद प्रमुख शासन सचिव (PHS) गायत्री राठौर को पत्र लिखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और सीएमएचओ को पद से हटाने की सिफारिश की थी। लेकिन, अर्दली की सांठगांठ के चलते हर बार कार्रवाई अटक गई।
PHS सख्त, JD बोले- सोमवार को बताऊंगा
घोटाले की खबर के बाद चिकित्सा विभाग की मुखिया (PHS) गायत्री राठौर ने खासी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने संयुक्त निदेशक (JD) भरतपुर को मामले की तत्काल जांच कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं। जब EXPOSE NOW ने इस संबंध में JD भरतपुर से सवाल किया, तो उन्होंने कहा, “सोमवार को पूरी जानकारी देखकर बता पाऊंगा।”
अब देखना यह है कि क्या निदेशालय और मंत्री की सख्ती इस ‘सिंडिकेट’ को तोड़ पाएगी, या फिर स्थानीय अधिकारी और जयपुर के दलाल मिलकर एक बार फिर सरकारी खजाने की लूट पर पर्दा डाल देंगे।
