मिड-डे मील महाघोटाला: बच्चों के निवाले पर 2000 करोड़ का डाका, कॉनफैड और निजी फर्मों के 21 चेहरों पर FIR

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राजस्थान में मानवता को शर्मसार करने वाला एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। कोविड-19 की विभीषिका के दौरान, जब प्रदेश के मासूम बच्चे स्कूलों से दूर थे, तब भ्रष्ट तंत्र ने उनके ‘मिड-डे मील’ के राशन पर 2000 करोड़ रुपये की बड़ी सेंध लगा दी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस महाघोटाले की जांच के बाद कॉनफैड (CONFED), केंद्रीय भंडार और निजी फर्मों से जुड़े 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।


आपदा में अवसर: ऐसे रचा गया ‘कागजी’ खेल

ACB की प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि महामारी के दौरान स्कूली बच्चों को दाल, तेल और मसालों के कॉम्बो पैक वितरित किए जाने थे। इस योजना को लूट का जरिया बनाने के लिए अधिकारियों और फर्मों ने मिलीभगत की:

  • नियमों की बलि: पसंदीदा फर्मों को फायदा पहुँचाने के लिए टेंडर की शर्तों को रातों-रात बदला गया।
  • फर्जी सप्लाई: कई जिलों में बिना राशन की वास्तविक आपूर्ति किए ही बिल तैयार कर लिए गए और सरकारी खजाने से करोड़ों का भुगतान उठा लिया गया।
  • घटिया गुणवत्ता: जहाँ राशन पहुँचा भी, वहां FSSAI और एगमार्क मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।

घोटाले का संगठित नेटवर्क (Modus Operandi)

जांच के अनुसार, यह कोई साधारण चोरी नहीं बल्कि एक सुनियोजित संगठित अपराध था:

घोटाले की कड़ीशामिल पक्षमुख्य आरोप
प्रशासनिक मिलीभगतकॉनफैड और केंद्रीय भंडार के अफसरटेंडर में हेराफेरी और फर्जी बिलों का सत्यापन।
निजी फर्मेंतिरुपति सप्लायर्स, जागृत एंटरप्राइजेज आदिसबलेटिंग और फर्जी सप्लायर्स का जाल बुनना।
वित्तीय हानिराज्य सरकारलगभग ₹2000 करोड़ का प्रत्यक्ष नुकसान।

नामजद आरोपियों में खलबली

ACB ने इस मामले में कॉनफैड के सहायक लेखाधिकारी, प्रबंधक, गोदाम कीपर और सुपरवाइजरों सहित निजी फर्मों के संचालकों को आरोपी बनाया है। एमटी एंटरप्राइजेज, साई ट्रेडिंग और अन्य फर्मों के ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच जारी है। ब्यूरो अब इन आरोपियों के बैंक खातों और अचल संपत्तियों की भी तलाश कर रहा है।

“जनता मांग रही जवाब”

यह घोटाला न केवल एक आर्थिक अपराध है, बल्कि गरीब बच्चों के पोषण के अधिकार पर एक क्रूर प्रहार है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या जांच का दायरा केवल इन 21 लोगों तक सीमित रहेगा या इस घोटाले के पीछे बैठे प्रभावशाली सफेदपोशों तक भी ACB के हाथ पहुँचेंगे?

“यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। दस्तावेजों की कूटरचना और सरकारी धन के दुरुपयोग की सघन जांच की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।” — ब्यूरो मुख्यालय, ACB जयपुर

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