JLF 2026: अब IQ नहीं, ‘CQ’ से तय होंगे वैवाहिक रिश्ते और करियर; नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने लॉन्च की नई किताब ‘करुणा’

जयपुर, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के फ्रंट लॉन में आज एक गरिमामयी समारोह में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की नई पुस्तक ‘करुणा: द पावर ऑफ कंपेशन’ (Karuna: The Power of Compassion) का अनावरण किया गया। इस अवसर पर नोबेल विजेता लेमा गबोवी, सुमेधा सत्यार्थी, ग्रैमी अवॉर्ड विजेता रिकी केज और प्रसिद्ध लेखक अमित त्रिपाठी मंच पर मौजूद रहे।

IQ का दौर खत्म, अब चलेगा CQ का जादू

समारोह को संबोधित करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने भविष्य के एक नए पैमाने ‘CQ’ (Compassion Quotient – करुणा सूचकांक) पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “अब तक कंपनियाँ इंटरव्यू में आपका IQ टेस्ट लेती थीं, लेकिन अब दौर बदलने वाला है। भविष्य में आईक्यू की जगह सीक्यू (CQ) को प्राथमिकता दी जाएगी। सीक्यू केवल दिमाग का खेल नहीं है, बल्कि यह आपकी चेतना, सोच, सजगता और एक्शन का एक अद्भुत मेल है।”

उन्होंने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि आने वाले समय में जब ऑनलाइन वैवाहिक रिश्ते तय होंगे, तो लोग कुंडली या आईक्यू के बजाय एक-दूसरे का ‘सीक्यू’ चेक करेंगे।

नोबेल पदक: ‘यह मेरा नहीं, पूरे देश का है’

अपने नोबेल पुरस्कार से जुड़ा एक भावुक संस्मरण साझा करते हुए सत्यार्थी ने बताया कि उन्होंने अपना पदक स्वयं के पास रखने के बजाय देश को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा:

“जब मुझे नोबेल मिला, तो मैंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इसे प्रत्येक भारतीय को समर्पित करने की इच्छा जताई। जब मैं सपरिवार राष्ट्रपति भवन पहुँचा और पदक राष्ट्रपति (तत्कालीन प्रणब मुखर्जी) को सौंपते हुए इसे वहां रखने का आग्रह किया, तो उन्होंने आश्चर्य से पूछा था— ‘ऐसा कौन करता है?’ तब से वह पदक राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में देश की अमानत के तौर पर रखा हुआ है।”

लेमा गबोवी ने की सत्यार्थी के विजन की सराहना

सत्र के दौरान नोबेल विजेता लेमा गबोवी ने कैलाश सत्यार्थी के साथ अपनी पहली मुलाकात को याद किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सत्यार्थी से नोबेल जीतने पर उनके विचार पूछे थे, तब उन्होंने कहा था— “यदि हम किसी एक व्यक्ति की सोच को बदलकर उसे सही दिशा दे सकें, तो वह किसी भी नोबेल पुरस्कार से कम नहीं है।”

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