जयपुर: राजस्थान के जलदाय विभाग (Public Health Engineering Department) के जमवारामगढ़ डिवीजन से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां करीब 2.25 करोड़ रुपये की लागत के तीन महत्वपूर्ण टेंडरों की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले तूल पकड़ने के बाद अब सरकार और विभाग की ‘क्वालिटी कंट्रोल विंग’ (Quality Control Wing) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है और एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर मामले की तह तक जाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
विभागीय जानकारी के अनुसार, जमवारामगढ़ डिवीजन में लगभग 75-75 लाख रुपये की लागत वाले तीन अलग-अलग NIT (Notice Inviting Tender) जारी किए जाने थे। नियमों के मुताबिक, इन तीनों NIT को गत 6 अगस्त को ही आधिकारिक ‘eProc पोर्टल’ पर अपलोड किया जाना अनिवार्य था।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि ये टेंडर तय समय पर अपलोड होने के बजाय करीब 12 दिन की भारी देरी के बाद 14 और 15 अगस्त को पोर्टल पर डाले गए।
अवकाश के दिनों में अपलोडिंग से बढ़ी पारदर्शिता पर शंका
टेंडर नोटिस के अनुसार, इन टेंडरों के लिए अमानत राशि (Earnest Money) जमा कराने की अंतिम समय सीमा 17 अगस्त को सुबह 10 बजे तक तय की गई थी। जानकारों और ठेकेदारों का कहना है कि 14 और 15 अगस्त को टेंडर अपलोड होने (इस दौरान स्वतंत्रता दिवस व अन्य अवकाश भी थे) के कारण बोलीदाताओं को टेंडर भरने और दस्तावेज़ तैयार करने के लिए बहुत कम समय मिला। इससे पूरी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
एक्सईएन की सफाई और वित्तीय स्वीकृति (FS) का पेंच
इस पूरे मामले में जब जमवारामगढ़ डिवीजन के एक्सईएन (XEN) नितेश मीणा से बात की गई, तो उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि ‘Financial Sanction’ (FS) यानी वित्तीय स्वीकृति समय पर नहीं मिलने के कारण टेंडर अपलोड करने में देरी हुई। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि ठेकेदारों को पर्याप्त समय देने के लिए टेंडर की तारीखें आगे बढ़ाई जानी थीं।
हालांकि, विभागीय विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Financial Sanction’ की मुख्य आवश्यकता कार्य आदेश (Work Order) जारी करते समय होती है, न कि प्रारंभिक स्तर पर NIT जारी करने के वक्त। ऐसे में FS नहीं मिलने का तर्क कितना सही है, यह विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
अब आगे क्या?
क्वालिटी कंट्रोल विंग के चीफ इंजीनियर प्रवीण आकोदिया ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। नियमों के तहत लापरवाही बरतने वाले और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। एक्सईएन नितेश मीणा की भूमिका भी सीधे तौर पर जांच के दायरे में है। 2.25 करोड़ के इस बहुचर्चित टेंडर मामले में अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही असली तस्वीर साफ होगी कि गाज किस-किस पर गिरती है।