जयपुर | राजस्व लक्ष्य पूरा करने के दबाव में आरटीओ प्रथम के उड़न दस्तों की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर नियमों की अनदेखी करते हुए वन टाइम टैक्स (ओटीटी) के नाम पर चालान तो बनाए गए, लेकिन वसूली गई राशि को टैक्स के बजाय जुर्माना (कंपाउंडिंग) में दर्शा दिया गया। इससे वाहन मालिकों पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
300 कारों से 7 करोड़ की वसूली
पड़ताल में सामने आया है कि वित्तीय वर्ष के दौरान 300 से अधिक कारों से करीब 7 करोड़ रुपए वसूले गए। यह राशि टैक्स के रूप में ली जानी थी, लेकिन इसे जुर्माने में दर्शाने के कारण वाहन मालिकों को अब राज्य में पंजीयन कराते समय दोबारा वन टाइम टैक्स देना पड़ सकता है। फरवरी-मार्च में सबसे ज्यादा कार्रवाई की गई।
हाईकोर्ट की रोक की अवहेलना
हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 में अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों से वन टाइम टैक्स वसूली पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सरकार को टैक्स वसूली के लिए नई अधिसूचना जारी करनी होगी। वर्तमान में ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है, फिर भी लाखों की वसूली जारी है।
इन 4 केसों से समझें पूरा मामला
| केस | वाहन का राज्य | वास्तविक चालान राशि | वसूली गई कुल राशि |
| केस 1 | मध्य प्रदेश (MP17-CC-5428) | मात्र ₹10,000 | ₹1.36 लाख |
| केस 2 | चंडीगढ़ (CH01-BE-6628) | मात्र ₹1,500 | ₹3.17 लाख |
| केस 3 | गुजरात (GJ01-WH-6828) | मात्र ₹600 | ₹2.50 लाख |
| केस 4 | हरियाणा (HR20-BA-5698) | मात्र ₹25,100 | ₹1.19 लाख |
विभागीय पक्ष और तर्क
“जिन कार मालिकों से ओटीटी की राशि जुर्माना में ली गई है, उन वाहन मालिकों को वेरिफिकेशन दिया जा रहा है। यह वाहन मालिक आने वाले दिनों में वाहन राजस्थान में पंजीकृत कराते हैं तो राशि समायोजित की जाएगी।”
— नाथू सिंह, डीटीओ (प्रवर्तन), आरटीओ प्रथम
“हाईकोर्ट ने व्यक्ति विशेष मामले में टैक्स नहीं वसूली का निर्णय दिया है। अन्य राज्य में पंजीकृत कार के जिन मालिकों को प्रदेश में कार का पंजीयन कराना है, उनकी राशि ओटीटी में जमा की है। जिन्हें पंजीयन नहीं कराना है, उनकी राशि जुर्माना में ली गई है। यह राशि विशेष परिस्थिति में कुछ कार मालिकों से ली है।”
— राजेंद्र शेखावत, आरटीओ प्रथम
